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चीन का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड - TRAIN 2 सेकंड में 700 Kmph!

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KIRTI

Jan 07, 2026 • 20 Views

चीन का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड - TRAIN 2 सेकंड में 700 Kmph!

 क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई ट्रेन सिर्फ 2 सेकंड में 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार पकड़ ले? जहाँ हम सामान्य तौर पर 20 या 30 सेकंड में एक्सीलरेशन की बात करते हैं, वहीं चीन ने इस अद्भुत कारनामे को कर दिखाया है। चीन की इस सबसे तेज़ मैग्लेव (Maglev) ट्रेन ने रेल और प्रोपल्शन साइंस (Propulsion Science) में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है।,

 प्रयोग का विवरण : 

आपको बता दें कि यह एक कंट्रोल्ड लैबोरेटरी स्केल एक्सपेरिमेंट था। यह परीक्षण चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। परीक्षण के लिए करीब 400 मीटर लंबे एक छोटे ट्रैक का इस्तेमाल किया गया और जिस वाहन का टेस्ट हुआ उसका वजन लगभग 1 टन था। जैसे ही इस वाहन ने अपनी पीक स्पीड हासिल की, इसे सुरक्षित रूप से डी-एक्सेलरेट (decelerate) करके रोक दिया गया।

यह तकनीक कैसे काम करती है? : 

यह उपलब्धि तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है: मैग्लेव टेक्नोलॉजी, सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन।

  • मैग्नेटिक लेविटेशन (Maglev):
  •  इस तकनीक में ट्रेन और पटरी के बीच कोई भौतिक संपर्क (physical contact) नहीं होता है। चुम्बकीय ध्रुवों (magnetic poles) के आपसी खिंचाव और धकाव की वजह से ट्रेन हवा में तैरती है, जिससे घर्षण (friction) शून्य हो जाता है।
  • सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स:
  •  ये मैग्नेट्स बहुत कम तापमान पर काम करते हैं और भारी इलेक्ट्रिक करंट ले जा सकते हैं, जिससे बिना किसी प्रतिरोध के एक शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड और 'मैसिव थ्रस्ट' (massive thrust) पैदा होता है।,

 हवाई जहाज और सामान्य ट्रेनों से तुलना :

 इसकी रफ़्तार का अंदाज़ा इस बात से लगाइए कि एक हवाई जहाज को रनवे पर टेक-ऑफ के लिए 250 से 300 kmph की रफ़्तार पकड़ने में 30 से 40 सेकंड लगते हैं। लेकिन इस मैग्लेव टेस्ट में 700 kmph की रफ़्तार सिर्फ 2 सेकंड में हासिल कर ली गई। सामान्य हाई-स्पीड ट्रेनें अपनी 350 kmph की रफ़्तार तक पहुँचने में कई मिनट का समय लेती हैं।

 क्या यह यात्रियों के लिए तैयार है? : 

नहीं, फिलहाल यह पैसेंजर सर्विस के लिए तैयार नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि इंसानी शरीर इतने तीव्र एक्सीलरेशन को सहन नहीं कर सकता; इससे आंतरिक चोटें और भारी असुविधा हो सकती है। इसके अलावा, सुपरकंडक्टिंग मैग्लेव ट्रैक का इंफ्रास्ट्रक्चर और क्रायोजेनिक सिस्टम बहुत महंगे होते हैं।

 चीन का भविष्य का विजन : 

चीन का लक्ष्य अगली पीढ़ी के परिवहन तंत्र को विकसित करना है। वे चाहते हैं कि बीजिंग से शंघाई (1200 किमी) की दूरी को महज 2 घंटे में पूरा किया जा सके, जो हवाई जहाज से भी तेज़ होगा।, इस तकनीक का असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट पर ही नहीं, बल्कि हाइपरलूप, स्पेस लॉन्च असिस्ट और डिफेंस रिसर्च जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ेगा।

( निष्कर्ष) : 

तो दोस्तों, यह एक्सपेरिमेंट भविष्य के ट्रांसपोर्टेशन साइंस का रोडमैप बदल सकता है। यह साबित करता है कि जमीन पर चलने वाले वाहन भी हवाई जहाज की गति को नियंत्रित परिस्थितियों में हासिल कर सकते हैं।

अनालॉजी (Analogy): इसे इस तरह समझिये कि मैग्लेव ट्रेन पटरी पर दौड़ने वाली ट्रेन नहीं, बल्कि पटरी के ठीक ऊपर हवा में तैरता हुआ एक रॉकेट है। जिस तरह हवा में घर्षण कम होने के कारण रॉकेट तेज़ी से आगे बढ़ता है, वैसे ही यह ट्रेन बिना छुए अपनी मंज़िल की ओर उड़ती है।

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