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50 मिलियन बैरल कच्चा तेल (Crude Oil) वेनेजुएला में तेल का खेल और ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक!

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SAURABH TRIPATHI

Jan 07, 2026 • 39 Views

50 मिलियन बैरल कच्चा तेल (Crude Oil) वेनेजुएला में तेल का खेल और ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक!

वेनेजुएला में 'तेल का खेल' अब खुलकर सामने आ गया है। जिस सच को अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप अब तक दवाओं और अन्य कारणों के पीछे छिपा रहे थे, वह अब पूरी दुनिया के सामने है। ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका को वेनेजुएला से 50 मिलियन बैरल कच्चा तेल (Crude Oil) मिलने जा रहा है। आखिर इस बड़े कदम के पीछे की असली रणनीति क्या है? क्या इससे भारत को भी फायदा होगा? चलिए इसे विस्तार से समझते हैं।

सेक्शन 1: 50 मिलियन बैरल का सौदा

 डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि अमेरिका को वेनेजुएला से 30 से 50 मिलियन बैरल हाई-क्वालिटी हैवी क्रूड प्राप्त होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि वेनेजुएला का तेल 'हैवी क्रूड' होता है, जिसे रिफाइन करने की क्षमता अमेरिका के गल्फ कोस्ट और भारत की रिलायंस (जामनगर) जैसी रिफाइनरीज में मौजूद है।

इस तेल की कुल कीमत लगभग 2.28 बिलियन डॉलर आंकी गई है। लेकिन यहाँ सबसे बड़ी बात यह है कि इस तेल की बिक्री से होने वाला सारा रेवेन्यू (राजस्व) अमेरिकी सरकार द्वारा कंट्रोल किया जाएगा, न कि वेनेजुएला की सरकार द्वारा। ट्रंप का दावा है कि इस फंड का इस्तेमाल दोनों देशों के लोगों के फायदे के लिए होगा, हालांकि विशेषज्ञ इस पर सवाल उठा रहे हैं।

सेक्शन 2: अमेरिका का कब्ज़ा और राजनीतिक उथल-पुथल

 आखिर रातों-रात ये सब कैसे बदल गया? आपको याद होगा कि 3 तारीख को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला कर निकोलस मादुरो को उनके बेडरूम से उठा लिया था। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक राजनीतिक बदलाव पूरा नहीं होता, तब तक अमेरिका अस्थायी रूप से वेनेजुएला को चलाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA, जिस पर अमेरिका ने खुद कड़े प्रतिबंध लगाए थे, अब उसी के जरिए तेल अमेरिका लाया जाएगा। इन तेल टैंकरों को सीधे अमेरिका के गल्फ कोस्ट पोर्ट्स पर उतारा जाएगा और शेवरॉन (Chevron) जैसी अमेरिकी कंपनियां इसकी लिफ्टिंग और लॉजिस्टिक्स का काम संभालेंगी।

सेक्शन 3: चीन को बड़ा झटका और ग्लोबल इम्पैक्ट

 इस कदम का सबसे बड़ा असर चीन पर पड़ने वाला है। वेनेजुएला अपने कुल निर्यात का लगभग 3/4 हिस्सा अकेले चीन को भेजता था। अब यदि यह तेल अमेरिका की ओर मोड़ दिया जाता है, तो लैटिन अमेरिका में चीन की ऊर्जा सुरक्षा काफी कमजोर हो जाएगी।

इसी वजह से रूस और चीन ने यूनाइटेड नेशन (UN) में इसकी कड़ी निंदा की है, इसे वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। यहाँ तक कि अमेरिका के कुछ सहयोगी देश भी इस बात से चिंतित हैं कि क्या इस तरह किसी देश के तेल भंडार पर नियंत्रण करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ नहीं है?

सेक्शन 4: आम आदमी और बाज़ार पर असर

 ट्रंप के इस ऐलान का असर वैश्विक बाज़ार पर तुरंत दिखा। कच्चे तेल की कीमतें धड़ाम से $60 प्रति बैरल के नीचे गिर गई हैं। सप्लाई बढ़ने की वजह से डिमांड का दबाव कम हुआ है, जिससे अमेरिका में ईंधन की कीमतें कम होंगी और महंगाई पर लगाम लगेगी।

भारत के लिए क्या है? भारत को भी इसका परोक्ष लाभ मिल सकता है क्योंकि वैश्विक स्तर पर तेल के दाम गिर रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों के शेयर्स में भी भारी उछाल देखा जा रहा है।

सेक्शन 5: वेनेजुएला का भविष्य

 वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार (300 बिलियन बैरल से ज्यादा) है, जो सऊदी अरब से भी अधिक है। लेकिन वर्षों के कुप्रबंधन और प्रतिबंधों के कारण वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि वहां उत्पादन को फिर से पुराने स्तर पर लाने में बिलियंस ऑफ डॉलर्स और कई साल लग जाएंगे।

निष्कर्ष (Analogy)

 इसे सरल भाषा में समझें तो, यह वैसा ही है जैसे किसी पुराने और खराब हो चुके कारखाने को एक शक्तिशाली पड़ोसी जबरन अपने हाथ में ले ले, ताकि वहां का माल अपने घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल कर सके और पड़ोसी प्रतिद्वंदियों की सप्लाई काट सके।

आपका इस 'ऑयल पॉलिटिक्स' के बारे में क्या सोचना है? कमेंट में जरूर बताएं। यूपीएससी की तैयारी के लिए आप स्टडी आईक्यू के 'प्रतिज्ञा बैच' से जुड़ सकते हैं, जानकारी डिस्क्रिप्शन में दी गई है।

 

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