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ईरान-अमेरिका संकट: क्या ट्रंप शुरू करेंगे सैन्य कार्रवाई?

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ANUJ

Jan 13, 2026 • 24 Views

ईरान-अमेरिका संकट: क्या ट्रंप शुरू करेंगे सैन्य कार्रवाई?

 ईरान के अंदर हालात बेहद गंभीर होते जा रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि अमेरिका वहां बड़े स्तर पर हस्तक्षेप (intervene) करने की योजना बना रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि वे प्रदर्शनकारियों पर हिंसा न करें, अन्यथा अमेरिका 'बहुत कड़े विकल्प' (very strong options) अपना सकता है।,

1. ईरान में आंतरिक संकट की वर्तमान स्थिति: ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े जन-आक्रोश का सामना कर रहा है। देश भर में लोग आर्थिक बदहाली, मुद्रा (currency) की गिरावट, बेतहाशा महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर हैं। सरकार ने इस पर भारी क्रैकडाउन किया है और इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया है। खबरों के अनुसार, अब तक कम से कम 203 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 162 प्रदर्शनकारी और 41 सुरक्षा बल के सदस्य शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा 500 से भी ऊपर हो सकता है।

2. डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और रणनीति: डोनाल्ड ट्रंप ईरान की स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान प्रदर्शनकारियों का दमन जारी रखता है, तो अमेरिकी सेना इसका जवाब देगी। ट्रंप की यह नीति उनकी "मैक्सिमम प्रेशर" और "क्रेडिबल मिलिट्री थ्रेट" की पुरानी रणनीति के अनुकूल है।

3. अमेरिका के पास क्या सैन्य विकल्प हैं? स्रोतों के अनुसार, यदि अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो वह निम्नलिखित तरीकों को अपना सकता है:

  • एयर स्ट्राइक (Air Strikes): अमेरिका ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांड सेंटर्स, मिसाइल लॉन्च केंद्रों और ड्रोन उत्पादन साइट्स पर हमला कर सकता है।
  • नेवल प्रेशर: अमेरिका अपनी नौसेना के जरिए अरेबियन सी की तरफ से दबाव बना सकता है।
  • साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: ईरान के सैन्य संचार को बाधित करने के लिए साइबर हमलों का सहारा लिया जा सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि अमेरिका 'ग्राउंड इन्वेशन' (जमीन पर सेना उतारना) से बचेगा। इसके पीछे मुख्य कारण ईरान की विशाल भौगोलिक स्थिति और इराक व लीबिया जैसे पिछले युद्धों से सीखे गए कड़वे सबक हैं। इसके अलावा, भले ही ईरानी लोग अपनी सरकार के खिलाफ हों, लेकिन वे अब भी पश्चिमी ताकतों (अमेरिका) को एक दुश्मन के रूप में ही देखते हैं।

4. इजराइल और क्षेत्रीय प्रभाव: ईरान में अस्थिरता के बीच इजराइल पूरी तरह हाई अलर्ट पर है। इजराइल ईरान को अपना अस्तित्वगत दुश्मन (existential enemy) मानता है और उसे डर है कि ईरान न्यूक्लियर बम विकसित कर सकता है।, यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो इसका असर लेबनान, गाजा और सीरिया तक फैलेगा।

5. ईरान की जवाबी तैयारी और चुनौतियां: ईरान ने भी अपनी रक्षा के लिए भारी सैन्य जमावड़ा किया है।

  • आंतरिक नियंत्रण: IRGC की इकाइयों और बख्तरबंद गाड़ियों को प्रमुख शहरों में तैनात किया गया है ताकि विद्रोह को रोका जा सके।
  • खतरनाक चेतावनी: तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने हस्तक्षेप किया, तो ईरान मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सीधा हमला कर सकता है और इजराइल को भी निशाना बना सकता है।

निष्कर्ष: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजस्कियन फिलहाल दोतरफा संदेश दे रहे हैं: वे प्रदर्शनकारियों की आर्थिक समस्याओं को सुनने का दावा कर रहे हैं, लेकिन साथ ही बाहरी ताकतों (अमेरिका और इजराइल) पर स्थिति का फायदा उठाने का आरोप भी लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका अपनी धमकियों को हकीकत में बदलता है।

एक सरल उदाहरण के माध्यम से समझें: 

ईरान की स्थिति एक ऐसे प्रेशर कुकर की तरह है जिसका सेफ्टी वाल्व (आर्थिक स्थिति) खराब हो चुका है और अंदर का दबाव (विरोध प्रदर्शन) लगातार बढ़ रहा है। अब बाहर से कोई (अमेरिका) कुकर को ठंडा करने की कोशिश करता है या उस पर प्रहार करता है, तो धमाका पूरे किचन (मिडल ईस्ट) को अपनी चपेट में ले सकता है।,

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