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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी, 2026 यानी मकर संक्रांति के बाद साउथ ब्लॉक से नए परिसर में स्थानांतरित हो सकते हैं

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SAURABH TRIPATHI

Jan 12, 2026 • 41 Views

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी, 2026 यानी मकर संक्रांति के बाद साउथ ब्लॉक से नए परिसर में स्थानांतरित हो सकते हैं

नमस्ते, आज हम भारतीय राजनीति के एक ऐतिहासिक बदलाव की बात कर रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री का कार्यालय यानी PMO, अब अपने पुराने पते 'साउथ ब्लॉक' को छोड़कर एक नए आधुनिक परिसर 'सेवा तीर्थ' में जाने के लिए तैयार है।

 

1. स्थानांतरण का समय और स्थान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी, 2026 यानी मकर संक्रांति के बाद साउथ ब्लॉक से नए परिसर में स्थानांतरित हो सकते हैं। यह नया परिसर, जिसे 'सेवा तीर्थ' या एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव कहा जाता है, राजधानी के केंद्र में दारा शिकोह रोड (पुराना नाम डलहौजी रोड) पर स्थित है।

2. कौन-कौन से विभाग होंगे शामिल: इस भव्य परिसर में केवल PMO ही नहीं, बल्कि कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के लिए भी अलग-अलग इमारतें बनाई गई हैं। जहाँ कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में ही यहाँ शिफ्ट हो चुका है, वहीं NSCS के भी जल्द ही यहाँ आने की उम्मीद है। इसके पास ही प्रधानमंत्री के लिए एक नया आवास भी निर्माणाधीन है।

3. निर्माण और लागत: इस परियोजना का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के लिए किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अनुबंध की लागत लगभग 1,189 करोड़ रुपये थी। सुरक्षा कारणों से इस प्रोजेक्ट की कई जानकारियों को गोपनीय रखा गया है।

4. आधुनिक सुविधाएँ: नए PMO की कार्यप्रणाली को आधुनिक कार्यक्षेत्रों (modern workspaces) की तरह डिजाइन किया गया है। प्रधानमंत्री का अपना कार्यालय और उच्च-स्तरीय बैठकों के लिए बने कमरे विशेष रूप से भव्य और औपचारिक लुक में तैयार किए गए हैं।

5. साउथ ब्लॉक का भविष्य: साउथ ब्लॉक का इतिहास देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल से जुड़ा है। अब, जब PMO यहाँ से चला जाएगा, तो साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को एक राष्ट्रीय संग्रहालय के रूप में बदल दिया जाएगा। यह पहली बार होगा जब रायसीना हिल्स पर स्थित ये लाल बलुआ पत्थर की इमारतें आम जनता के लिए खोली जाएँगी।

निष्कर्ष (Conclusion): यह बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत पहले ही नया संसद भवन और 'कर्तव्य भवन' जैसे सचिवालय बनाए जा चुके हैं। यह कदम न केवल शासन व्यवस्था को आधुनिक बनाएगा, बल्कि भारत की ऐतिहासिक धरोहरों को जनता के करीब भी लाएगा।

एनालॉजी (Analogy): PMO का साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ में जाना वैसा ही है जैसे कोई परिवार अपनी पुरानी पुश्तैनी हवेली की यादों को संजोकर, उसकी मरम्मत कर उसे एक संग्रहालय बना दे और स्वयं सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस एक नए स्मार्ट घर में रहने चला जाए। यह कदम पुरानी विरासत के सम्मान और भविष्य की जरूरतों के बीच एक संतुलन है।

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