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भारत और चीन के बीच शाक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) पर विवाद

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KIRTI

Jan 13, 2026 • 2 Views

भारत और चीन के बीच शाक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) पर विवाद

आज की बड़ी खबर भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की शाक्सगाम घाटी को लेकर है, जिस पर चीन ने एक बार फिर अपना अवैध दावा ठोक दिया है।

 जी हाँ, चीन ने हाल ही में 1960 के दशक में पाकिस्तान के साथ हुए एक समझौते की आड़ में शाक्सगाम घाटी पर अपना दावा पेश किया है,। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार (12 जनवरी) को कहा कि शाक्सगाम घाटी "चीन की है" और चीन वहां बुनियादी ढांचे (infrastructure) का निर्माण करने के अपने अधिकारों के भीतर है। उन्होंने 1963 के सीमा समझौते का हवाला देते हुए दावा किया कि दोनों देशों के बीच सीमाएं पहले ही तय हो चुकी हैं।

 इस पर भारत की क्या प्रतिक्रिया रही है?

 भारत ने चीन के इस विमर्श को कड़ाई से खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि "शाक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है"। भारत ने चीन द्वारा वहां किए जा रहे निर्माण कार्यों को "अवैध और अमान्य" करार दिया है।

जायसवाल ने यह भी दोहराया कि:

  • भारत ने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान 'सीमा समझौते' को कभी मान्यता नहीं दी है।
  • भारत इस समझौते को शुरू से ही अवैध मानता आया है।
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत के "अभिन्न और अटूट" हिस्से हैं और रहेंगे।

 क्या भारत ने 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे' (CPEC) पर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है?

 बिल्कुल। भारत ने CPEC की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि यह परियोजना उस भारतीय क्षेत्र से गुजरती है जो पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे में है,। भारत ने अपनी यह चिंता पाकिस्तान और चीन दोनों के समक्ष कई बार उठाई है।

 दर्शकों की जानकारी के लिए बता दें कि भौगोलिक रूप से शाक्सगाम घाटी की स्थिति क्या है?

 शाक्सगाम घाटी सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में स्थित है। इसकी सीमा उत्तर में चीन के झिंजियांग (Xinjiang) क्षेत्र से और दक्षिण व पश्चिम में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) से लगती है।

 धन्यवाद। तो यह स्पष्ट है कि भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा।

उपमा (Analogy):

 चीन और पाकिस्तान के बीच का यह समझौता कुछ वैसा ही है जैसे कोई पड़ोसी आपके घर के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर ले और फिर किसी तीसरे पक्ष के साथ मिलकर उस हिस्से का सौदा कर ले। भारत का रुख यह है कि जब वह हिस्सा मूल रूप से उसका है, तो किसी भी बाहरी समझौते की कोई कानूनी वैधता नहीं रह जाती।

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