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नीट पीजी विवाद: योग्यता की हत्या या मजबूरी?

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KIRTI

Jan 18, 2026 • 61 Views

नीट पीजी विवाद: योग्यता की हत्या या मजबूरी?

कल्पना कीजिए कि आप एक विमान में बैठे हैं और उड़ान भरने से ठीक पहले आपको पता चलता है कि उस विमान के पायलट ने अपनी फ्लाइंग परीक्षा में नेगेटिव मार्क्स प्राप्त किए थे। उसे लाइसेंस केवल इसलिए दे दिया गया क्योंकि सीट खाली थी। क्या आप उस विमान में बैठना पसंद करेंगे? आज यही सवाल भारत के हेल्थ केयर सिस्टम के सामने खड़ा है। यह सवाल किसी वर्ग या जाति का नहीं, बल्कि डॉक्टर और मरीज के बीच के उस पवित्र भरोसे का है, जिसे 0 परसेंटाइल की पात्रता ने हिला कर रख दिया है।

 नीट पीजी और 0 परसेंटाइल का गणित) :

नीट पीजी (NEET PG) वह परीक्षा है जो एमबीबीएस के बाद एमडी (MD) और एमएस (MS) जैसे विशेषज्ञ कोर्स के लिए दी जाती है। यह 800 अंकों की परीक्षा होती है जिसमें नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है, जिसका अर्थ है कि गलत उत्तर देने पर आपके अंक कट जाते हैं। यहाँ तक कि इस व्यवस्था में -40 तक का स्कोर भी संभव है।

अब तक का नियम यह था कि कम से कम 50 परसेंटाइल लाने वाला छात्र ही योग्य माना जाता था। लेकिन हाल ही में, काउंसलिंग के तीसरे दौर के बाद कट-ऑफ को घटाकर 0 परसेंटाइल कर दिया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि किसी छात्र ने परीक्षा में केवल अपना नाम लिखा है या लगभग सारे सवाल गलत किए हैं और उसके अंक माइनस में हैं, तब भी वह भारत में सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट या पीडिएट्रिशियन बनने के योग्य हो सकता है।

 सरकार का तर्क बनाम असलियत :

सरकार का तर्क है कि 18,000 सीटें खाली रह गई थीं, जिन्हें भरना जरूरी था। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या उपलब्धता (Availability) कभी योग्यता (Competence) का विकल्प हो सकती है? लाखों एमबीबीएस डॉक्टर्स होने के बावजूद सीटें खाली रहने के पीछे तीन कड़वी सच्चाइयां हैं:

  1. बुनियादी ढांचे का खोखलापन (Infrastructure Inflation): 
  2. देश में मेडिकल कॉलेज तो खोल दिए गए, लेकिन वहां न पर्याप्त मरीज हैं, न आधुनिक लैब और न ही योग्य फैकल्टी। बिना मरीज देखे कोई छात्र विशेषज्ञ कैसे बनेगा?
  3. निजी कॉलेजों का 'डेप्थ ट्रैप' (Private College Trap):
  4.  निजी कॉलेजों में पीजी की एक सीट करोड़ों रुपये की होती है,। 0 परसेंटाइल का मतलब है कि जिसके पास पैसा है, वह मेरिट को बायपास कर सकता है। यह शिक्षा नहीं, बल्कि एक कमोडिटी मार्केट जैसा व्यवहार है।
  5. फैकल्टी का गंभीर संकट:
  6.  अनुभवी डॉक्टर्स पढ़ाने के बजाय प्रशासनिक कार्यों और फाइलों में दबे रहते हैं। एक डॉक्टर के पीछे सैकड़ों छात्र हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता होना तय है।

 वैश्विक साख और भविष्य का संकट :

भारतीय डॉक्टर्स को दुनिया भर में 'गोल्ड स्टैंडर्ड' माना जाता रहा है और 'ब्रांड इंडिया' की चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी साख रही है,। लेकिन जब हम अपनी घरेलू चयन प्रक्रिया को इतना कमजोर कर देंगे कि -40 अंक पर भी एडमिशन होने लगेंगे, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय डॉक्टरों की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी।

याद कीजिए 2021 की कोविड लहर, जहाँ समस्या केवल ऑक्सीजन की नहीं, बल्कि उन विशेषज्ञ हाथों की भी थी जो वेंटिलेटर और आईसीयू चला सकें। कागज पर डॉक्टर बनाना आसान है, लेकिन धरातल पर विशेषज्ञ तैयार करने के लिए गंभीर निवेश और कौशल विकास की आवश्यकता होती है।

NEET परीक्षा के बारे में जानकारी :

NEET (National Eligibility cum Entrance Test) भारत की एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है, जिसके माध्यम से मेडिकल और डेंटल कोर्सेज़ में दाख़िला मिलता है।

NEET के प्रकार

NEET-UG:

कोर्स: MBBS, BDS, BAMS, BHMS, BSMS, BUMS, BVSc & AH

योग्यता: 12वीं (Physics, Chemistry, Biology)

आयोजन: NTA (National Testing Agency)

NEET-PG:

कोर्स: MD, MS, PG Diploma

योग्यता: MBBS डिग्री

आयोजन: NBEMS (National Board of Examinations)

NEET-UG परीक्षा पैटर्न

विषय: Physics, Chemistry, Biology

प्रश्न: बहुविकल्पीय (MCQs)

अवधि: 3 घंटे 20 मिनट

अंकन: सही उत्तर +4, गलत उत्तर -1

NEET-PG परीक्षा पैटर्न

प्रश्न: 200 MCQs

अवधि: 3 घंटे 30 मिनट

सिलेबस: MBBS स्तर के सभी विषय

NEET कट-ऑफ

कट-ऑफ हर साल बदलती है

यह कुल उम्मीदवारों, परीक्षा कठिनाई और सीटों पर निर्भर करती है

सरकारी कॉलेजों में प्रवेश के लिए आमतौर पर उच्च स्कोर आवश्यक होता है

NEET क्यों ज़रूरी है?

भारत में मेडिकल शिक्षा के लिए एकमात्र मान्य प्रवेश परीक्षा

पारदर्शी और मेरिट आधारित चयन प्रणाली

सरकारी और निजी दोनों कॉलेजों में मान्य

निष्कर्ष :

क्या हम केवल सीट भरने वाली मशीनें (Seat Filling Machines) तैयार कर रहे हैं या हमें वास्तव में एक जीवन बचाने वाली प्रणाली (Life Saving System) की जरूरत है?, एक माँ भी अपने बच्चे का इलाज उस डॉक्टर से नहीं कराना चाहेगी जो -40 स्कोर पर डॉक्टर बना हो। भारतीय चिकित्सा का भविष्य मानकों से समझौता करने में नहीं, बल्कि उन्हें और मजबूत करने में है।

समापन :

आपकी इस विषय पर क्या राय है? क्या योग्यता के साथ यह समझौता सही है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

 

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