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क्या भारत वाकई AI में 'सेकंड टियर' देश है?

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SAURABH TRIPATHI

Jan 22, 2026 • 53 Views

क्या भारत वाकई AI में 'सेकंड टियर' देश है?

 स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है,। इस बहस का केंद्र है भारत की AI प्रोग्रेस। जहाँ एक तरफ IMF की चीफ ने भारत को AI के मामले में 'सेकंड टियर' (दूसरा स्तर) का देश बताया, वहीं हमारे आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका ऐसा करारा जवाब दिया जो अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है,।

विवाद क्या है? (The Conflict): 

दावोस में एक पैनल डिस्कशन के दौरान, IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने देशों को AI कैपेबिलिटी के आधार पर वर्गीकृत (classify) किया। उन्होंने अमेरिका, चीन और कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं को 'टॉप टियर' में रखा, जबकि भारत और अन्य उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को 'सेकंड टियर' में डाल दिया। इसका मतलब यह था कि IMF की नजर में भारत अभी हाई-एंड AI रिसर्च और बड़े फ्रंटियर मॉडल्स के मामले में दुनिया के लीडर्स में शामिल नहीं है,।

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस वर्गीकरण को सीधे तौर पर चुनौती दी। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की AI इंडेक्स रिपोर्ट का हवाला देते हुए कुछ ठोस तथ्य पेश किए:

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्या है? :

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी Artificial Intelligence (AI) ऐसी तकनीक है जिसमें मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, सीखने, निर्णय लेने और समस्याएँ हल करने की क्षमता दी जाती है। AI सिस्टम डेटा से सीखते हैं और समय के साथ बेहतर होते जाते हैं।

AI कैसे काम करता है?

AI मुख्य रूप से इन तकनीकों पर आधारित होता है:

मशीन लर्निंग (Machine Learning): डेटा से पैटर्न सीखना

डीप लर्निंग (Deep Learning): न्यूरल नेटवर्क के जरिए जटिल फैसले

नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP): भाषा को समझना और बोलना

कंप्यूटर विज़न: तस्वीरों और वीडियो को समझना

भारत में AI की भूमिका :

भारत में AI का उपयोग डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी, स्टार्टअप्स, फिनटेक, एग्रीटेक और गवर्नेंस में तेजी से बढ़ रहा है। AI भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार और नवाचार को नई दिशा दे रहा है।

AI के फायदे :

काम की गति और सटीकता बढ़ती है

लागत कम होती है

बेहतर निर्णय लेने में मदद

नए रोजगार और अवसर

 

  • भारत AI टैलेंट की उपलब्धता के मामले में दुनिया के टॉप 3 देशों में आता है。
  • AI स्किल पेनिट्रेशन (कौशल पैठ) के मामले में हम दूसरे स्थान पर हैं।
  • भारत दुनिया में ओपन सोर्स AI प्रोजेक्ट्स में सबसे बड़ा योगदान देने वाला देश है और यहाँ दुनिया की सबसे बड़ी AI डेवलपर कम्युनिटी है।

नजरिये का फर्क: वेस्टर्न बनाम भारतीय (The Perspective Shift): 

सूत्रों के अनुसार, यह विवाद केवल रैंकिंग का नहीं, बल्कि AI की परिभाषा का है।

  • पश्चिमी नजरिया (Western Perspective): इनका ध्यान इस पर है कि AI मॉडल कितना बड़ा है, उसमें कितने अरबों डॉलर लगे हैं और हाई-एंड सेमीकंडक्टर पर किसका कब्जा है।
  • भारतीय नजरिया (Indian Perspective): 
  • भारत का फोकस 'मास डिप्लॉयमेंट' (बड़े पैमाने पर उपयोग) और 'डेमोक्रेटाइजेशन' पर है,। अश्विनी वैष्णव का तर्क है कि AI कोई परमाणु हथियार नहीं, बल्कि एक सामान्य तकनीक है जिसका लाभ आम आदमी तक पहुँचना चाहिए。

भारत का 5-लेयर AI स्टैक (India's 5-Layer AI Stack):

 अश्विनी वैष्णव ने भारत के सिस्टमिक अप्रोच को समझाने के लिए पाँच स्तरों (layers) का जिक्र किया:

  1. एप्लीकेशन लेयर: गवर्नेंस, हेल्थकेयर और कृषि में AI का बड़े पैमाने पर उपयोग।
  2. मॉडल लेयर: 'वैनिटी मॉडल्स' के बजाय भारत डोमेन-विशिष्ट और कुशल मॉडल्स पर ध्यान दे रहा है।
  3. चिप लेयर: सेमीकंडक्टर डिजाइन और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना।
  4. इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर: स्टार्टअप्स के लिए कंप्यूटिंग क्षमता और डेटा सेंटर्स का निर्माण,。
  5. एनर्जी लेयर: सस्टेनेबल और पावर-एफिशिएंट AI इकोसिस्टम विकसित करना।

निष्कर्ष (Conclusion): 

भारत केवल दावे नहीं कर रहा, बल्कि इसके पीछे 'इंडिया AI मिशन' जैसी नीतियां हैं, जिसमें ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया जा रहा है,। भारत खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में देख रहा है, जो AI को समावेशी और नैतिक (ethical) बनाने की वकालत करता है,।

अंत में, दावोस की यह बहस हमें सिखाती है कि 21वीं सदी में लीडरशिप का मतलब सिर्फ सबसे बड़ा मॉडल बनाना नहीं, बल्कि तकनीक से आम आदमी के जीवन में बदलाव लाना है,।

 

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