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भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता और कारों पर टैरिफ कटौती

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SAURABH TRIPATHI

Jan 27, 2026 • 43 Views

भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता और कारों पर टैरिफ कटौती

भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता और कारों पर टैरिफ कटौती

(परिचय) नमस्कार दोस्तों! आज भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर एक बहुत बड़ी घोषणा हुई है। इस समझौते की सबसे प्रमुख बात यह है कि भारत ने यूरोपीय गाड़ियों पर लगने वाले 110% टैरिफ को घटाकर केवल 40% करने का निर्णय लिया है। आने वाले वर्षों में इसे और भी कम करके 10% तक लाया जा सकता है।

FTA और उसका महत्व :

यह समझौता कोई छोटा-मोटा सौदा नहीं है, बल्कि इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (Mother of all deals) कहा जा रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (जिसमें 27 देश शामिल हैं) के बीच यह बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, जो कई उतार-चढ़ाव के बाद अब जाकर संपन्न हुई है। 2027 तक इसके पूरी तरह लागू होने की संभावना है। एक FTA का मुख्य उद्देश्य दो पक्षों के बीच व्यापार किए जाने वाले सामानों पर टैरिफ को हटाना या कम करना होता है ताकि व्यापार और निवेश बढ़ सके।

उपभोक्ताओं को लाभ और ब्रांड्स:

 टैरिफ में इस भारी कटौती का सीधा लाभ भारतीय उपभोक्ताओं को मिलेगा। यह छूट मुख्य रूप से 15,000 यूरो से अधिक मूल्य वाली प्रीमियम और लग्जरी कारों पर लागू होगी। इसके कारण BMW, Mercedes-Benz, Audi, और Jaguar Land Rover जैसे ब्रांड्स की गाड़ियां 10 से 25 लाख रुपये तक सस्ती हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, पहले जो गाड़ी टैरिफ के कारण 2.1 करोड़ की पड़ती थी, वह अब 20-25 लाख रुपये कम में मिल सकेगी।

(भारत ने यह फैसला क्यों लिया?) अब सवाल यह उठता है कि भारत ने यह रियायत क्यों दी?

मार्केट एक्सेस: 

भारत चाहता है कि उसके कपड़ा (Textiles), चमड़ा (Leather), रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery) और सेवा (Services) क्षेत्र को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिले।

रणनीतिक साझेदारी: 

भारत अपनी व्यापारिक निर्भरता को चीन और अमेरिका से हटाकर विविधता लाना चाहता है, और यूरोपीय संघ एक स्थिर आर्थिक भागीदार है।

निवेश का संदेश: इससे वैश्विक स्तर पर यह संदेश जाता है कि भारत एक ओपन और निवेश के अनुकूल (Investment-friendly) देश है।

(घरेलू उद्योग की सुरक्षा और रेड लाइन्स) भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए कुछ कड़े कदम भी उठाए हैं:

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV):
  •  भारतीय स्टार्टअप्स और नवाचार को बचाने के लिए कम से कम अगले 5 वर्षों तक EV पर टैरिफ कम नहीं किया जाएगा
  • कृषि और डेयरी: 
  • भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से बाहर रखा है क्योंकि यह देश के लिए एक 'रेड लाइन' है।
  • मास मार्केट कारें:
  •  जो सस्ती गाड़ियां भारत में अधिक बिकती हैं, उन पर टैरिफ कम नहीं किया गया है ताकि स्थानीय निर्माताओं जैसे Tata Motors और Mahindra के हितों की रक्षा की जा सके।

निष्कर्ष :

 कुल मिलाकर, यह समझौता भारत को चीन के एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में पेश करेगा और वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) बनने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। हालांकि इससे घरेलू प्रीमियम कार सेगमेंट पर कुछ दबाव आ सकता है, लेकिन 'नियंत्रित उदारीकरण' (Controlled Liberalization) के माध्यम से भारत ने अपने हितों को सुरक्षित रखने की कोशिश की है।

 

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