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प्रयागराज पंचकोशी परिक्रमा - आस्था और परंपरा का संगम

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NEELU TRIPATHI

Jan 05, 2026 • 8 Views

प्रयागराज पंचकोशी परिक्रमा - आस्था और परंपरा का संगम

 माघ मेला 2026 के पावन अवसर पर, तीर्थराज प्रयागराज में पंचकोशी परिक्रमा का भव्य शुभारंभ हो गया है। यह आध्यात्मिक यात्रा प्रयागराज मेला प्राधिकरण, पंचदशनाम जूना अखाड़ा और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है।

 

सूत्रधार: इस वर्ष की परिक्रमा का सबसे विशेष आकर्षण वे विंटेज कारें हैं, जिन पर सवार होकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और अन्य महामंडलेश्वर इस धार्मिक यात्रा पर निकले हैं। इन शानदार कारों में सवार संतों को देख श्रद्धालुओं के बीच भारी उत्साह और गहरी आस्था का माहौल बना हुआ है।

 

सूत्रधार: परिक्रमा के औपचारिक प्रारंभ से पूर्व, जूना अखाड़ा के महामंत्री हरी गिरि महाराज ने अन्य संतों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों से भेंट की। उन्होंने मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, जिलाधिकारी मनीष वर्मा और एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजयपाल शर्मा को आयोजन की रूपरेखा दी और प्रशासन के सहयोग के लिए आभार प्रकट किया।

5 दिवसीय परिक्रमा का विवरण:

प्रथम दिन (Day 1): 

परिक्रमा की शुरुआत संगम स्नान से हुई। इसके पश्चात संतों ने अक्षयवट, लेटे हनुमान मंदिर, दत्तात्रेय मंदिर, सरस्वती कूप, रामघाट, मौजिगिरि समाधि, ललिता देवी, कल्याणी देवी और वनखंडी महादेव के दर्शन किए।

द्वितीय दिन (Day 2):

 दूसरे दिन का भ्रमण अरैल क्षेत्र में केंद्रित रहेगा। यहाँ श्रद्धालु शूलटंकेश्वर महादेव, आदि माधव, चक्र माधव, सोमेश्वर महादेव और गदा माधव के दर्शन करेंगे।

तृतीय दिन (Day 3):

 तीसरे दिन की यात्रा में मनकामेश्वर महादेव, पद्म माधव, सुजावन देव, पराशर ऋषि आश्रम और वाल्मीकि आश्रम का भ्रमण कराया जाएगा।

चतुर्थ दिन (Day 4):

 परिक्रमा के चौथे दिन श्रद्धालु शंख माधव, दुर्वासा ऋषि आश्रम, संकट हरण हनुमान, पाण्डेश्वर महादेव, सीताकुंड, निषादराज स्थली और नागवासुकी के दर्शन हेतु पहुँचेंगे।

पंचम दिन - समापन (Day 5):

 अंतिम दिन संगम स्नान के साथ परिक्रमा पूर्ण होगी। इसके बाद राम-जानकी मंदिर और कीडगंज में दर्शन होंगे, और अंत में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की भीड़ और जयकारे

सूत्रधार: यह पंचदिवसीय परिक्रमा न केवल प्रयागराज के प्रमुख धार्मिक और पौराणिक स्थलों के दर्शन का माध्यम है, बल्कि यह हमारी प्राचीन संस्कृति और आधुनिकता (विंटेज कारों के माध्यम से) का एक अनूठा संगम भी है।

 

एनालॉग (Analogy): 

इस परिक्रमा को आप एक 'आध्यात्मिक मैराथन' की तरह समझ सकते हैं, जहाँ प्रतिभागी शरीर की क्षमता के लिए नहीं, बल्कि अपनी आत्मा की शांति और ईश्वर की समीपता के लिए प्रयागराज के हर कोने को अपनी श्रद्धा से मापते हैं।

 

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