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आलीशान गाड़ियों वाले सतुआ बाबा की माघ मेले में धूम

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NEELU TRIPATHI

Jan 15, 2026 • 37 Views

आलीशान गाड़ियों वाले सतुआ बाबा की माघ मेले में धूम

आलीशान गाड़ियों वाले सतुआ बाबा की माघ मेले में धूम

 प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 में इन दिनों एक सन्यासी की जीवनशैली और उनके विचार चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बने हुए हैं। यह हैं वाराणसी के सतुआ बाबा पीठ के प्रमुख, जगतगुरु महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ 'सतुआ बाबा', जो अपनी आलीशान गाड़ियों के साथ मेले में पहुँचे हैं।

 

 सतुआ बाबा के काफिले में लैंड रोवर डिफेंडर और पोर्श (Porsche) जैसी करोड़ों की लग्जरी कारें शामिल हैं। इसके अलावा, उन्हें अक्सर ब्रांडेड धूप के चश्मों और आधुनिक गैजेट्स के साथ देखा जाता है। जब उनसे उनकी इस हाई-प्रोफाइल जीवनशैली पर सवाल किया गया, तो उन्होंने विरोधियों पर बरसते हुए कहा कि क्या आध्यात्मिकता में आस्था रखने वाले लोग इन गाड़ियों में सफर नहीं कर सकते? उनके अनुसार, यह "राम का भारत" और "विकास का भारत" है और यही सनातन धर्म की असली शक्ति है। वे मानते हैं कि संतों को भी समय के साथ आधुनिक संसाधनों का उपयोग करना चाहिए।

 पीठ का इतिहास और सामाजिक कार्य : सतुआ बाबा जिस पीठ का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसका इतिहास बेहद गौरवशाली है:

  • पीठ का इतिहास: सतुआ बाबा पीठ विष्णुस्वामी संप्रदाय (रुद्र संप्रदाय) से संबंधित है और पिछले 250-300 वर्षों से सनातन संस्कृति के संरक्षण में लगी है।
  • नाम की कहानी: इस पीठ के संस्थापक श्री रणछोड़ दास जी महाराज भक्तों को प्रसाद में 'सतुआ' (भुने चने का आटा) खिलाते थे, जिससे इसका नाम 'सतुआ बाबा' पड़ा।
  • सामाजिक सेवा: वाराणसी के मणिकर्णika घाट के पास स्थित यह आश्रम एक प्राचीन संस्कृत विद्यालय चलाता है, जहाँ छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा, भोजन और आवास मिलता है। साथ ही, यह आश्रम शोक संतप्त परिवारों को संबल प्रदान करने का कार्य भी करता है।

 सतुआ बाबा का कद और प्रभाव :

 संतोष दास जी इस परंपरा के 7वें पीठाधीश्वर हैं, जिन्हें फरवरी 2025 में प्रयागराज महाकुंभ के दौरान जगतगुरु की उपाधि से विभूषित किया गया था। उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अत्यंत करीबी माना जाता है। वे गौ रक्षा और राम मंदिर आंदोलन से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं और हमेशा प्रखर हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के पक्ष में अपनी राय रखते हैं।

(निष्कर्ष )

 सतुआ बाबा का कहना है कि जो लोग सनातन धर्म को दबाने की कोशिश कर रहे थे, वे अब इसकी प्रगति की रफ्तार के आगे टिक नहीं पाएंगे। माघ मेले में उनकी उपस्थिति यह संदेश देती है कि आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संगम ही नए भारत की पहचान है।

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