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ईरान में कोहराम और फांसी की चुनौती

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ANUJ

Jan 14, 2026 • 40 Views

ईरान में कोहराम और फांसी की चुनौती

 ईरान में कोहराम और फांसी की चुनौती

 ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच आज एक बड़ी और भयावह खबर आ रही है। ईरान में प्रदर्शनों का आज 18वां दिन है और सरकार एक प्रदर्शनकारी को सरेआम फांसी देने की तैयारी में है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव पैदा कर दिया है।

 

 26 साल के इरफान सुलतानी की जिंदगी अब चंद घंटों की मेहमान बची है। उन्हें आज सरेआम फांसी दी जा सकती है। सुलतानी पर 'मोहरेबेह' यानी भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया है, जो ईरानी कानून में मौत की सजा वाला सबसे गंभीर अपराध है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सुलतानी को न वकील मिला और न ही अपील का मौका; यह केवल लोगों में डर फैलाने के लिए किया जा रहा एक 'फास्ट-ट्रैक' ट्रायल है।

 

 इस घटनाक्रम पर अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है। डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने फांसी की कार्रवाई शुरू की, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। ट्रम्प ने ईरानी प्रदर्शनकारियों को सरकारी इमारतों पर कब्जा करने की सलाह दी है और कहा है कि 'मदद रास्ते में है'। इतना ही नहीं, ट्रम्प ने ऐलान किया है कि ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।

 

 दूसरी तरफ, ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी ने पलटवार करते हुए ट्रम्प और इजराइली PM नेतन्याहू को ही हत्यारा करार दिया है।

 

 ईरान में हिंसा का मंजर बेहद डरावना हो चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान के अस्पतालों के बाहर लाशों के ढेर लगे हैं। ब्रिटिश वेबसाइट 'ईरान इंटरनेशनल' का दावा है कि अब तक 12,000 प्रदर्शनकारियों की हत्या की जा चुकी है, जबकि अन्य एजेंसियां यह संख्या 2,000 से 2,400 के बीच बता रही हैं।

 

 इस तनाव का असर भारत पर भी पड़ रहा है। ईरान में पढ़ रहे 2,000 कश्मीरी छात्रों के परिवार गहरे खौफ में हैं। इंटरनेट बंद होने के कारण माता-पिता का अपने बच्चों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे घाटी में चिंता बढ़ गई है।

 

 राजनीति के गलियारों में अब सत्ता परिवर्तन की आहट भी सुनाई दे रही है। खबर है कि ट्रम्प के प्रतिनिधि ने निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी से गुप्त मुलाकात की है, जो ईरान में लोकतांत्रिक बदलाव का नेतृत्व करने की इच्छा जता चुके हैं।

एन्कर: क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव ईरान को इन फांसियों को रोकने पर मजबूर कर पाएगा या यह संघर्ष एक और बड़े युद्ध की आहट है? इस पर हमारी नजर बनी रहेगी।

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