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क्या डोनाल्ड ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करना चाहते हैं?

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KIRTI

Jan 18, 2026 • 22 Views

क्या डोनाल्ड ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करना चाहते हैं?

 हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रम्प ने नेटो (NATO) से कहा है कि वे ग्रीनलैंड से चीन और रूस को 'उखाड़ कर फेंक दें' (Throw out),। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्रीनलैंड में वाकई चीन और रूस की मौजूदगी है? और ट्रम्प अचानक ग्रीनलैंड पर इतना ज़ोर क्यों दे रहे हैं?

ग्रीनलैंड का महत्व : 

ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित है। इसका अधिकांश हिस्सा आर्कटिक सर्कल के अंदर आता है, जो इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।

  • यहाँ से आर्कटिक शिपिंग रूट्स और एयर रूट्स गुज़रते हैं।
  • अमेरिका का यहाँ पहले से ही थुले एयर बेस (Thule Air Base) है, जहाँ से वह रूस की गतिविधियों और बैलिस्टिक मिसाइलों पर नज़र रखता है।

ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित है। यह डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन इसकी अपनी सरकार और प्रशासन है।

ग्रीनलैंड का अधिकांश भाग बर्फ की मोटी चादर (आइस शीट) से ढका हुआ है। यहां की आबादी बहुत कम है और ज़्यादातर लोग तटीय इलाकों में रहते हैं। इनुइट समुदाय यहां की मूल जनजाति है।

ग्रीनलैंड अपने आर्कटिक मौसम, बर्फीले पहाड़ों, ग्लेशियरों और नॉर्दर्न लाइट्स (ऑरोरा) के लिए प्रसिद्ध है। हाल के वर्षों में यह द्वीप जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों और भू-राजनीतिक महत्व के कारण वैश्विक चर्चा में रहा है।

क्या चीन और रूस वहाँ मौजूद हैं? 

 सच्चाई यह है कि ग्रीनलैंड में रूस का कोई सैन्य बेस नहीं है; उनका असली प्रभाव उनकी अपनी आर्कटिक तटरेखा (जैसे मुरमांस्क) पर है,। जहाँ तक चीन का सवाल है, उनका कोई सैन्य आधार नहीं है। अतीत में चीन ने कुछ माइनिंग और रिसर्च स्टेशन बनाने की कोशिश की थी, लेकिन ग्रीनलैंड ने उनके निवेश को पर्यावरण के आधार पर हटा दिया है,। स्रोतों के अनुसार, फिलहाल वहाँ ऐसा कोई चीनी या रूसी कब्ज़ा नहीं है जिसे 'उखाड़ फेंकने' की ज़रूरत हो।

(ट्रम्प की असली मंशा) तो फिर ट्रम्प ऐसा क्यों कह रहे हैं? इसके पीछे कई गहरे कारण हैं:

  1. बहाना ढूंढना: ट्रम्प रूस और चीन के खतरे का नाम लेकर ग्रीनलैंड पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण चाहते हैं,।
  2. आर्थिक लाभ: जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, जिससे वहाँ सोना, हीरा, तांबा और ग्रेफाइट जैसे कीमती खनिजों तक पहुँच आसान हो गई है। एक बिजनेसमैन होने के नाते, ट्रम्प इन संसाधनों पर कब्ज़ा चाहते हैं。
  3. एकपक्षीय कार्रवाई की धमकी: 
  4. ट्रम्प का संदेश है कि यदि नेटो या डेनमार्क ने कार्रवाई नहीं की, तो अमेरिका एकपक्षीय (unilaterally) निर्णय ले सकता है। उन्होंने उन देशों पर टैरिफ लगाने की भी धमकी दी है जो उनके ग्रीनलैंड प्लान का समर्थन नहीं करेंगे।

(वैश्विक प्रतिक्रिया और चुनौतियाँ)

  • डेनमार्क और ग्रीनलैंड: 
  • डेनमार्क ने ट्रम्प के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ग्रीनलैंड के लोग खुद को स्वतंत्र करने का अधिकार (Right to self-determination) रखते हैं और वे अमेरिकी नियंत्रण नहीं चाहते,।
  • नेटो (NATO): 
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रम्प अपनी मर्जी थोपते हैं, तो इससे नेटो टूट सकता है और अमेरिका के सहयोगियों के बीच भरोसे की कमी आ सकती है।
  • भू-राजनीतिक परिणाम: आर्कटिक अब महाशक्तियों के बीच प्रतिद्वंद्विता का नया थिएटर बनता जा रहा है, जैसा कभी अफगानिस्तान हुआ करता था,।

निष्कर्ष :

ट्रम्प का यह बयान केवल राजनीतिक बयानबाज़ी (rhetoric) नहीं है, बल्कि यह भविष्य के आर्कटिक ऑर्डर पर नियंत्रण पाने की एक बड़ी चाल है,। क्या अमेरिका वाकई ग्रीनलैंड पर अपनी संप्रभुता स्थापित कर पाएगा या यह केवल एक कूटनीतिक विवाद बनकर रह जाएगा, यह तो वक्त ही बताएगा।

यह जानकारी पूरी तरह से आपके द्वारा दिए गए स्रोतों पर आधारित है।,,,,,,,,,,,,

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