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2025 बना दुनिया का तीसरा सबसे गर्म साल; 1.5°C की सीमा तीन वर्षों से लगातार पार

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ATHARV

Jan 14, 2026 • 26 Views

2025 बना दुनिया का तीसरा सबसे गर्म साल; 1.5°C की सीमा तीन वर्षों से लगातार पार

 2025 बना दुनिया का तीसरा सबसे गर्म साल; 1.5°C की सीमा तीन वर्षों से लगातार पार

 जलवायु परिवर्तन को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बार फिर दुनिया को चेतावनी दी है। यूरोपीय संघ (EU) के वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि साल 2025 अब तक का तीसरा सबसे गर्म साल दर्ज किया गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पृथ्वी ने लगातार तीसरे वर्ष 1.5 डिग्री सेल्सियस की ग्लोबल वार्मिंग सीमा को पार कर लिया है।

यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन साल (2023, 2024, और 2025) रिकॉर्ड पर सबसे गर्म रहे हैं। साल 2025, रिकॉर्ड के हिसाब से 2023 की तुलना में केवल 0.01 डिग्री सेल्सियस ही ठंडा था। ब्रिटेन की राष्ट्रीय मौसम सेवा, मेट ऑफिस ने भी पुष्टि की है कि 1850 के बाद से 2025 तीसरा सबसे गर्म वर्ष रहा है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह इतिहास में पहली बार हुआ है जब लगातार तीन वर्षों तक औसत वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर (pre-industrial levels) से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है

विशेषज्ञों की राय

 ECMWF की सामंथा बर्गेस ने कहा है कि तापमान में होने वाली डिग्री की हर छोटी वृद्धि मायने रखती है, क्योंकि इससे मौसम की चरम घटनाएं और भी गंभीर हो जाती हैं। वहीं, कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के निदेशक कार्लो बुओनटेम्पो का मानना है कि हम इस सीमा को पार करने की ओर बढ़ चुके हैं, और अब हमें इसके समाज और प्राकृतिक प्रणालियों पर पड़ने वाले प्रभावों को संभालने की ज़रूरत है।

(जलवायु परिवर्तन का असर) इस बढ़ते तापमान के परिणाम पहले ही दिखाई देने लगे हैं:

  • 2025 में यूरोप के जंगलों में लगी आग से अब तक का सबसे अधिक उत्सर्जन दर्ज किया गया।
  • कैरिबियन में 'हरिकेन मेलिसा' जैसे विनाशकारी तूफान आए।
  • पाकिस्तान में मानसूनी बारिश और बाढ़ के कारण 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

निष्कर्ष

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में पर्याप्त कटौती नहीं की गई, तो दुनिया 2030 से पहले ही 1.5 डिग्री सेल्सियस की इस सीमा को स्थायी रूप से पार कर सकती है—जो पेरिस समझौते के अनुमान से लगभग एक दशक पहले है। यदि ऐसा होता है, तो भविष्य में और भी लंबी लू (heatwaves), भीषण तूफान और बाढ़ जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं।

(साभार: यह स्क्रिप्ट स्रोतों में दी गई जानकारी पर आधारित है।)

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