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Apple और Google की महा-डील - AI की दुनिया में भूचाल

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ANUJ

Jan 14, 2026 • 21 Views

Apple और Google की महा-डील - AI की दुनिया में भूचाल

 Apple और Google की महा-डील - AI की दुनिया में भूचाल

टेक इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक ऐसी डील हुई है जिसने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। दिग्गज कंपनी Apple ने Google के साथ एक मल्टी-ईयर स्ट्रैटेजिक AI पार्टनरशिप की है। इस डील के तहत Apple के डिवाइसेस, जैसे कि iPhone और iPad में Google के पावरफुल AI मॉडल 'Gemini' का इस्तेमाल किया जाएगा।

(Apple को इस डील की ज़रूरत क्यों पड़ी?) 

Apple को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि वह AI की रेस में अपने प्रतिद्वंद्वियों जैसे Microsoft और OpenAI (ChatGPT) से काफी पीछे छूट रहा था। Apple का अपना असिस्टेंट 'सीरी' (Siri) अब उतना रेलेवेंट नहीं रह गया था और जटिल सवालों (multi-step queries) के जवाब देने में फेल हो रहा था।

अपना खुद का एडवांस AI मॉडल बनाना बहुत महंगा है, जिसके लिए हज़ारों GPU और अरबों डॉलर की ज़रूरत होती है। इसलिए, Apple ने 'व्हील को दोबारा री-इन्वेंट' करने के बजाय Google से आउटसोर्सिंग करने का फैसला किया।

(Siri में क्या बदलेगा?)

 इस साझेदारी के बाद सीरी (Siri) पूरी तरह बदल जाएगी। अब यह सिर्फ़ अलार्म सेट करने या मौसम बताने तक सीमित नहीं रहेगी। Gemini AI की मदद से सीरी अब मल्टी-स्टेप रीजनिंग कर सकेगी, आपके पिछले संदर्भों (context) को याद रखेगी और ऐप्स के बीच ऑटोमैटिकली काम कर पाएगी, जैसे कि आपके लिए टिकट बुक करना या कैलेंडर मैनेज करना।

(Google और OpenAI पर प्रभाव)

  • Google का फायदा: 
  • इस डील से Google का Gemini रातों-रात दुनिया का डिफ़ॉल्ट AI बन जाएगा क्योंकि यह 2 बिलियन से ज़्यादा Apple डिवाइसेस पर उपलब्ध होगा। इसके बदले Google को Apple से हर साल $1 बिलियन का रेवेन्यू मिलेगा। इस खबर के आते ही Google की पैरेंट कंपनी Alphabet का मार्केट वैल्यूएशन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।
  • OpenAI को झटका: अभी तक Apple अपनी ज़रूरतों के लिए ChatGPT पर निर्भर था, लेकिन अब ChatGPT सेकेंडरी ऑप्शन बन जाएगा और Google का Gemini मुख्य AI इंजन होगा।

(प्राइवेसी और विवाद)

 Apple का हमेशा से दावा रहा है कि आपका डेटा सुरक्षित है, इसलिए वे Gemini के ऊपर एक प्राइवेसी लेयर बनाएंगे ताकि यूज़र का डेटा सीधे Google के साथ शेयर न हो। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि चूँकि बैक-एंड Google का है, इसलिए डेटा की पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे।

ईलन मस्क भी इस डील से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि यह शक्तियों का अनुचित केंद्रीकरण (unreasonable concentration of power) है, क्योंकि Google के पास पहले से ही Android और Chrome का दबदबा है।

(निष्कर्ष)

 यह डील साफ करती है कि अब स्मार्टफोन्स की दुनिया हार्डवेयर (कैमरा, बैटरी) से हटकर इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन की तरफ बढ़ रही है। जो कंपनियाँ AI को नहीं अपनाएंगी, वे नोकिया और ब्लैकबेरी की तरह इतिहास बन सकती हैं।

नोट: स्रोत के अनुसार Alphabet का मार्केट वैल्यूएशन 4 ट्रिलियन हिट करने की बात कही गई है, जिसे आप स्वतंत्र रूप से सत्यापित कर सकते हैं क्योंकि यह जानकारी स्रोत पर आधारित है।

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