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क्या भारत को ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस' ऑफर स्वीकार करना चाहिए?

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SAURABH TRIPATHI

Jan 19, 2026 • 34 Views

क्या भारत को ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस' ऑफर स्वीकार करना चाहिए?

 हाल ही में एक बहुत ही अजीब खबर सामने आई है। डोनल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अनोखा ऑफर दिया है—गाज़ा और दुनिया के अन्य युद्धों को सुलझाने के लिए एक "बोर्ड ऑफ पीस" (Board of Peace) बनाने का प्रस्ताव। अब भारत सरकार इस उलझन में है कि इस बोर्ड का हिस्सा बना जाए या नहीं।

(बोर्ड ऑफ पीस क्या है? 

 ट्रंप का आइडिया है कि दुनिया भर के नेताओं का एक समूह बनाया जाए जो युद्धग्रस्त इलाकों में स्थायी शांति स्थापित करे। इस बोर्ड के चेयरमैन खुद डोनल्ड ट्रंप होंगे। ट्रंप का कहना है कि वे दुनिया भर के प्रभावशाली नेताओं को एक साथ बिठाकर गाज़ा जैसे मुद्दों का समाधान निकालेंगे।

(सदस्य और आमंत्रण - Who's Invited?) इस बोर्ड के लिए ट्रंप ने कई देशों को आमंत्रित किया है:

  • भारत: पीएम मोदी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
  • अन्य देश: अर्जेंटीना, अल्बेनिया, तुर्की और रूस के राष्ट्रपति को भी न्योता दिया गया है।
  • हैरानी की बात: ट्रंप ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को भी इस शांति बोर्ड में आमंत्रित किया है।
  • कौन गायब है?
  •  फ्रांस, जर्मनी और चीन जैसे बड़े देशों का इस लिस्ट में कहीं नाम नहीं है।

 इस बोर्ड का हिस्सा बनना मुफ्त नहीं है। "टाइम मैगजीन" की रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड में एक परमानेंट सीट पाने के लिए हर देश को कम से कम 1 बिलियन डॉलर (यानी करीब 9000 करोड़ रुपये) देने होंगे। यह एक ड्राफ्ट चार्टर के जरिए सामने आया है, जिसे ट्रंप का एक "बिजनेस डील" जैसा प्लान माना जा रहा है।

(चिंता के विषय - Key Concerns) 

इस प्रस्ताव को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं:

  1. जवाबदेही (Accountability): क्या ट्रंप के पास इन अरबों डॉलर्स का कोई हिसाब होगा? ट्रंप का कहना है कि बोर्ड की सील और हेडक्वार्टर (संभवतः वाशिंगटन या न्यूयॉर्क) वे खुद तय करेंगे।
  2. यूनाइटेड नेशंस का क्या? क्या यह बोर्ड UN की जगह लेने की कोशिश कर रहा है? हालांकि ट्रंप ने दावा किया है कि UN सुरक्षा परिषद ने इस बोर्ड का समर्थन किया है, लेकिन भारत ने अब तक इसे एंडोर्स नहीं किया है।
  3. ट्रंप की अनिश्चितता: ट्रंप खुद कई बार युद्ध जैसी धमकियाँ दे चुके हैं, ऐसे में उनकी अध्यक्षता में "शांति बोर्ड" कितना सफल होगा, यह बड़ा सवाल है।

(निष्कर्ष - Conclusion :

 भारत के लिए यह फैसला आसान नहीं है। एक तरफ 9000 करोड़ रुपये का भारी निवेश है और दूसरी तरफ पाकिस्तान जैसे देशों के साथ बैठने और ट्रंप की अनप्रिडिक्टेबल पॉलिटिक्स का जोखिम है।

गाज़ा, जिसे गाज़ा पट्टी (Gaza Strip) कहा जाता है, मध्य-पूर्व में स्थित एक छोटा लेकिन अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। यह क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक संघर्ष, मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय विवादों के केंद्र में रहा है।

गाज़ा पट्टी भूमध्य सागर के किनारे स्थित है।

इसके उत्तर और पूर्व में इज़राइल, और दक्षिण-पश्चिम में मिस्र है।

क्षेत्रफल लगभग 365 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन यहाँ 20 लाख से अधिक लोग रहते हैं।

वर्ष 2007 से गाज़ा पर हमास (Hamas) का नियंत्रण है।

इज़राइल और हमास के बीच कई बार युद्ध और संघर्ष हो चुके हैं।

इज़राइल ने गाज़ा की सीमा, हवाई क्षेत्र और समुद्री मार्ग पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं।

यह संघर्ष मुख्य रूप से इज़राइल और फ़िलिस्तीन विवाद का हिस्सा है।

समय-समय पर रॉकेट हमले, हवाई हमले और ज़मीनी कार्रवाई होती रहती है।

आम नागरिक, खासकर बच्चे और महिलाएं, सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं।

आपका क्या सोचना है? क्या भारत को 1 बिलियन डॉलर देकर इस 'बोर्ड ऑफ पीस' का हिस्सा बनना चाहिए या इससे दूर रहना चाहिए? अपने विचार कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें।

धन्यवाद!

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