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एम.के. स्टालिन और पीएम मोदी

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SAURABH TRIPATHI

Jan 13, 2026 • 14 Views

एम.के. स्टालिन और पीएम मोदी

श्रीलंका में तमिलों का भविष्य और मुख्यमंत्री स्टालिन का पत्र

एंकर: नमस्कार। दक्षिण एशिया की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत और तीखा पत्र लिखकर श्रीलंका में तमिल समुदाय के भविष्य को लेकर हस्तक्षेप की मांग की है।

 एम.के. स्टालिन और पीएम मोदी की तस्वीरों के साथ ‘स्प्लिट स्क्रीन’

एंकर : इस पत्र के केंद्र में वह डर है कि श्रीलंका एक बार फिर तमिलों के हाशिए पर जाने के संरचनात्मक कारणों को संबोधित किए बिना संवैधानिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के नेतृत्व में तैयार किया जा रहा नया संविधान, तमिलों की राजनीतिक स्वायत्तता की आकांक्षाओं को नजरअंदाज कर सकता है।

 

एंकर : स्टालिन ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि श्रीलंका के तमिल पिछले 77 वर्षों से व्यवस्थित भेदभाव और हिंसा झेल रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि 1947, 1972 और 1978 के पुराने संविधानों ने 'एकात्मक राज्य' (unitary state) के ढांचे को बढ़ावा दिया, जिससे तमिलों के अधिकारों का हनन हुआ और उनकी पारंपरिक भूमि पर कब्जा किया गया।

 

एंकर : मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से 1985 के 'थिम्पू सिद्धांतों' को फिर से जीवित करने की मांग की है, जिनमें शामिल हैं:

  • श्रीलंकाई तमिलों को एक विशिष्ट राष्ट्र के रूप में मान्यता देना।
  • उत्तरी और पूर्वी प्रांतों को तमिलों की पारंपरिक मातृभूमि मानना।
  • तमिल राष्ट्र के लिए आत्मनिर्णय का अधिकार।
  • एक संघीय (Federal) शासन प्रणाली की स्थापना करना।

 

एंकर: स्टालिन ने जोर देकर कहा है कि भारत के लिए यह केवल एक विदेशी मामला नहीं है, बल्कि एक नैतिक और रणनीतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत को श्रीलंका पर संघीय व्यवस्था के लिए दबाव डालना चाहिए, जो हमारे अपने संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है।

एंकर: क्या केंद्र सरकार मुख्यमंत्री स्टालिन की इस अपील पर कोई कड़ा रुख अपनाएगी? यह देखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि तमिलनाडु में लाखों लोगों की भावनाएं इस मुद्दे से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

 

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