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दिनेश वाघमारे - विवादों के घेरे में महाराष्ट्र के राज्य चुनाव आयुक्त

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SAURABH TRIPATHI

Jan 15, 2026 • 40 Views

दिनेश वाघमारे - विवादों के घेरे में महाराष्ट्र के राज्य चुनाव आयुक्त

 दिनेश वाघमारे - विवादों के घेरे में महाराष्ट्र के राज्य चुनाव आयुक्त

 महाराष्ट्र के राज्य चुनाव आयुक्त (SEC) दिनेश टी. वाघमारे वर्तमान में गंभीर जांच और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। 1994 बैच के आईएएस अधिकारी, वाघमारे ने 28 जनवरी 2025 को महाराष्ट्र के सातवें राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था, जो राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से उनकी सेवानिवृत्ति के ठीक बाद हुआ।

 शैक्षणिक और करियर पृष्ठभूमि 

वाघमारे का प्रशासनिक करियर और शैक्षणिक योग्यता काफी प्रभावशाली रही है:

  • शिक्षा: उन्होंने VNIT नागपुर से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में BTech, IIT खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में MTech और यूके के ब्रैडफोर्ड विश्वविद्यालय से MSc की डिग्री प्राप्त की है।
  • अनुभव: उन्होंने गृह, ऊर्जा और सामाजिक न्याय विभागों में प्रधान सचिव के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा, वे पिंपरी चिंचवाड़ और नवी मुंबई के नगर आयुक्त, अमरावती के संभागीय आयुक्त और बुलढाणा के कलेक्टर भी रह चुके हैं।

 वर्तमान चुनावी विवाद

 जनवरी 2026 में हुए महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के दौरान कई समस्याओं ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है:

  • निलंबन की मांग: शिवसेना (UBT) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने चुनावों में कथित अनियमितताओं को लेकर वाघमारे के निलंबन की मांग की है।
  • विपक्ष के आरोप: विपक्षी दलों ने उम्मीदवारों के हलफनामे अपलोड करने में देरी, मतदान के अंतिम 48 घंटों में घर-घर जाकर प्रचार करने की अनुमति और मुंबई में गणना के दौरान PADU (प्रिंटिंग ऑक्सिलरी डिस्प्ले यूनिट) मशीनों की शुरुआत जैसे निर्णयों पर सवाल उठाए हैं।

 अमिट स्याही (Indelible Ink) का विवाद 

मतदान के दिन स्याही के मिट जाने के आरोपों पर वाघमारे ने अपना बचाव करते हुए कहा:

  • उन्होंने स्पष्ट किया कि 2011 से इसी मार्कर पेन वाली स्याही का उपयोग किया जा रहा है और यह वही स्याही है जो भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उपयोग की जाती है।
  • वाघमारे के अनुसार, स्याही को सूखने में 10 से 12 सेकंड लगते हैं, और यदि कोई इसे सुखाने से पहले मिटा देता है, तो यह मतदाता की गलती है।
  • उन्होंने चेतावनी दी कि स्याही मिटाने वाले मतदाताओं के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।

 पुराना विवाद (2017) 

SEC बनने से पहले भी वाघमारे विवादों में रहे थे। 2017 में, जब वे सामाजिक न्याय विभाग के सचिव थे, तब उनके बेटे को अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए सरकारी छात्रवृत्ति पर विदेश (पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी) पढ़ने भेजने पर 'हितों के टकराव' के आरोप लगे थे। हालांकि, वाघमारे ने यह कहकर अपना बचाव किया था कि शीर्ष वैश्विक विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने वाले छात्रों के लिए आय सीमा में छूट दी गई थी।

 निष्कर्ष 

वर्तमान में, वाघमारे इन आरोपों और सोशल मीडिया पर फैल रही 'भ्रामक जानकारी' की जांच करने की बात कह रहे हैं, जबकि विपक्ष उनके इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग पर अड़ा हुआ है।

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