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स्मृति ईरानी की मानसिक सुदृढ़ता की कहानी

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KIRTI

Jan 11, 2026 18
स्मृति ईरानी की मानसिक सुदृढ़ता की कहानी

                                             "मेरी मर्जी"

 स्मृति ईरानी की मानसिक सुदृढ़ता की कहानी

स्मृति ईरानी एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने मॉडल, एक बेहद सफल टेलीविजन अभिनेता और यहाँ तक कि एक केंद्रीय मंत्री की भूमिका निभाई है। लेकिन इस सफर में वे हमेशा जनता और मीडिया की कड़ी निगरानी (scrutiny) में रही हैं।

 

स्मृति जी, आप लगभग 17 साल बाद फिर से 'तुलसी विरानी' के रूप में अभिनय में क्यों लौट रही हैं?

"मेरी मर्जी!"। मुझे जीवन के हर पड़ाव पर इसी तरह के सवालों का सामना करना पड़ा है। पहले कहते थे नौकरी क्यों नहीं कर रही, अब कह रहे हैं नौकरी क्यों कर रही है। जब मंत्री बनाया तो पूछा एक्टर को क्यों बनाया, और अब पूछ रहे हैं कि मंत्री क्यों नहीं बनाया। लोगों को एक सिक्का उछालना चाहिए और खुद तय कर लेना चाहिए कि वे मुझसे क्या चाहते हैं, क्योंकि "ये चित भी मेरी, पट भी मेरी" नहीं चलेगा।

 

स्मृति ईरानी की यह बेबाकी वास्तव में मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक सुरक्षा कवच है। लगातार सार्वजनिक जांच से मानसिक थकान (decision fatigue) और तनाव (anxiety) पैदा हो सकता है। जब कोई व्यक्ति "मेरी मर्जी" जैसे शब्दों का प्रयोग करता है, तो वह अपनी सीमाओं (boundaries) को सुरक्षित करता है और अपनी स्वायत्तता (autonomy) को बनाए रखता है।

 

 मानसिक शांति बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ कुछ सुझाव देते हैं:

  • नकारात्मक मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म से दूरी बनाएं।
  • बाहरी प्रशंसा के बजाय अपने आंतरिक मूल्यों (internal values) पर ध्यान केंद्रित करें।
  • दोस्तों और परिवार का एक मजबूत समर्थन तंत्र रखें।

 

स्मृति ईरानी के लिए "मेरी मर्जी" केवल एक जवाब नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करने और अपनी गरिमा बनाए रखने का एक सचेत प्रयास है।

 

सार्वजनिक आलोचना और निरंतर सवालों के बीच रहना उस तेज़ बारिश की तरह है जिसे आप रोक नहीं सकते, लेकिन "मेरी मर्जी" कहना उस छाते की तरह है जो आपके मानसिक संतुलन और स्वाभिमान को भीगने से बचाता है।

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