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आर्टेमिस II - 53 साल बाद चंद्रमा की ओर मानवता की वापसी

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ATHARV

Jan 14, 2026 • 38 Views

आर्टेमिस II - 53 साल बाद चंद्रमा की ओर मानवता की वापसी

आर्टेमिस II - 53 साल बाद चंद्रमा की ओर मानवता की वापसी

विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया में एक ऐतिहासिक घोषणा हुई है। नासा (NASA) ने आर्टेमिस II मिशन की तारीख तय कर दी है, जो मानवता को 50 से अधिक वर्षों के बाद फिर से चंद्रमा की दहलीज पर ले जाएगा। 1972 में अपोलो कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद, यह पहली बार होगा जब इंसान 'लो अर्थ ऑर्बिट' को छोड़कर अंतरिक्ष में इतनी दूर जाएगा।

 मिशन का विवरण और तारीख) प्रस्तोता: नासा के अनुसार, यह मिशन 6 फरवरी को लॉन्च होने वाला है। हालांकि, मौसम या अन्य तकनीकी कारणों को ध्यान में रखते हुए, 31 जनवरी से 14 फरवरी तक की 'लॉन्च विंडो' खुली रखी गई है। यदि 6 फरवरी को लॉन्च नहीं हो पाता है, तो 7, 8, 10 और 11 फरवरी को बैकअप के रूप में रखा गया है।

 चालक दल (Crew) और अंतरिक्ष यान

 इस 10 दिवसीय यात्रा पर चार अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे: नासा के रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसन। ये यात्री नासा के शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट पर सवार होकर ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान में अपनी यात्रा पूरी करेंगे।

 मिशन कैसे काम करेगा?

 ध्यान देने वाली बात यह है कि आर्टेमिस II चंद्रमा पर उतरेगा नहीं। यह केवल एक 'क्लोज फ्लाईबी' (close flyby) मिशन है।

  • सबसे पहले, ओरियन यान पृथ्वी की कुछ कक्षाओं में चक्कर लगाएगा ताकि जीवन रक्षक उपकरणों (life support equipment) की जांच की जा सके।
  • इसके बाद, यह चंद्रमा की ओर बढ़ेगा और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग 'स्लिंगशॉट' (slingshot) की तरह करके वापस पृथ्वी की ओर लौटेगा। इस तकनीक का लाभ यह है कि यदि कुछ गलत भी होता है, तो यान सुरक्षित रूप से वापस लौट सकेगा।

भविष्य की तैयारी 

आर्टेमिस II वास्तव में एक ट्रायल मिशन है। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यान, सुरक्षा प्रणालियों और मनुष्यों को इतनी दूर भेजने की व्यवहार्यता की जांच करना है। इसके सफल होने के बाद ही आर्टेमिस III मिशन भेजा जाएगा, जिसका लक्ष्य वास्तव में मनुष्यों को चंद्रमा की सतह पर उतारना होगा।

 समापन  इस मिशन की पहली चरण की शुरुआत 17 जनवरी से होगी, जब SLS रॉकेट और ओरियन को केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39B पर लाया जाएगा। पूरी दुनिया की निगाहें अब फरवरी की उस तारीख पर टिकी हैं जब इतिहास एक बार फिर रचा जाएगा।

 

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