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साइबर सुरक्षा के 4 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई

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ATHARV

Jan 14, 2026 • 29 Views

साइबर सुरक्षा के 4 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई

साइबर सुरक्षा के 4 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई

 अक्सर हम सोचते हैं कि हैकिंग वैसी ही होती है जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है, जहाँ कोई जीनियस कोडिंग के ज़रिए सब कुछ कंट्रोल कर लेता है। लेकिन असलियत काफी अलग है। आज हम पॉपुलर साइंस (Popular Science) के लेख के आधार पर साइबर सुरक्षा से जुड़े 4 बड़े मिथकों का पर्दाफाश करेंगे।

मिथक 1: हैकिंग केवल सुपर जीनियस कंप्यूटर नर्ड्स का काम है

  • सच्चाई: टीवी पर हैकिंग को केवल कौशल (skills) का खेल दिखाया जाता है, लेकिन हकीकत में लोगों को धोखा देना कहीं ज़्यादा आसान है
  • तथ्य: वेरिज़ोन 2025 डेटा ब्रीच इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के अनुसार, 60 प्रतिशत प्रमुख डेटा ब्रीच इंसानी भागीदारी (human involvement) के कारण शुरू होते हैं, न कि केवल ऑटोमेटेड कोडिंग से।
  • कैसे होता है? ज्यादातर हैकर्स लीक हुए यूजरनेम और पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं या 'सोशल इंजीनियरिंग' (जैसे फर्जी कॉल या ईमेल) के ज़रिए लोगों को फँसाते हैं।

मिथक 2: टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) समय की बर्बादी है

  • सच्चाई: लॉग-इन के समय एक अतिरिक्त कोड डालना थोड़ा परेशान करने वाला हो सकता है, लेकिन यह सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है।
  • तथ्य: अमेरिकी साइबर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा एजेंसी (CISA) के अनुसार, जिस अकाउंट में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन होता है, उसके हैक होने की संभावना 99 प्रतिशत कम हो जाती है
  • सुझाव: यदि ऐप-आधारित ऑथेंटिकेशन उपलब्ध न हो, तो SMS-आधारित सुरक्षा भी कुछ न होने से बेहतर है।

मिथक 3: VPN पूरी तरह से प्राइवेट और सुरक्षित होते हैं

  • सच्चाई: कई लोग VPN को सुरक्षा का "जादुई बटन" मानते हैं, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन (EFF) के अनुसार, विज्ञापन इनके फायदों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं।
  • तथ्य: VPN का मुख्य काम आपके नेटवर्क कनेक्शन को किसी दूसरे नेटवर्क के ज़रिए भेजना (routing) है। यह आपके इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) से आपकी जानकारी छिपाता है, लेकिन आपका सारा डेटा अब VPN प्रदाता के पास होता है, इसलिए एक भरोसेमंद प्रदाता चुनना ज़रूरी है。

मिथक 4: सॉफ्टवेयर अपडेट्स इतने महत्वपूर्ण नहीं हैं

  • सच्चाई: अपडेट्स को टालना आपके डिवाइस के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
  • तथ्य: हर अपडेट सुरक्षा की खामियों को ठीक (patch) करता है। जैसे ही कोई अपडेट जारी होता है, दुनिया को यह पता चल जाता है कि पुराने वर्जन में क्या कमजोरी थी।
  • उदाहरण: इसे ऐसे समझें जैसे चोरों को पता चल जाए कि आपके घर के पुराने ताले की एक मास्टर चाबी उपलब्ध है। क्या आप ताला नहीं बदलेंगे? सॉफ्टवेयर अपडेट्स ठीक इसी तरह ताला बदलने जैसा काम करते हैं

निष्कर्ष

साइबर सुरक्षा केवल तकनीक के बारे में नहीं, बल्कि खुद को शिक्षित करने के बारे में भी है। सुरक्षित रहें और अपनी डिजिटल जानकारी की सुरक्षा को गंभीरता से लें।

 

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