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केदारनाथ: चौमासी से सोनप्रयाग तक 7 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग का प्रस्ताव

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NEELU TRIPATHI

Jan 07, 2026 • 25 Views

केदारनाथ: चौमासी से सोनप्रयाग तक 7 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग का प्रस्ताव

केदारनाथ: चौमासी से सोनप्रयाग तक 7 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग का प्रस्ताव

केंद्र सरकार ने केदारनाथ तक सड़क संपर्क सुधारने के लिए एक नई 7 किलोमीटर लंबी सुरंग की पहचान की है। यह सुरंग गुप्तकाशी के पास कालीमठ घाटी में स्थित चौमासी को सोनप्रयाग से जोड़ेगी। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो इससे यात्रा के समय में कमी आएगी और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा में सुधार होगा। सोनप्रयाग वह स्थान है जहाँ से रोपवे शुरू होगा, जिससे भक्तों को मंदिर तक पहुँचने में आसानी होगी।

आपातकालीन निकास और वैकल्पिक मार्ग: इसे एक ट्विन-ट्यूब (जुड़वां) संरचना के रूप में नियोजित किया गया है, जो खराब मौसम या किसी संकट के दौरान आपातकालीन निकास मार्ग के रूप में कार्य करेगी। कठिन इलाके और अचानक मौसम परिवर्तन वाले इस क्षेत्र में अधिकारी इसे एक प्रमुख सुरक्षा विशेषता मान रहे हैं।

सड़क चौड़ीकरण: वर्तमान में, सोनप्रयाग और गौरीकुंड जाने वाले वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्ग-107 का उपयोग करना पड़ता है। इस नई योजना के तहत, कालीमठ घाटी में मौजूदा एक-लेन सड़क को दो-लेन में चौड़ा किया जाएगा ताकि सुरंग खुलने के बाद बढ़ने वाले यातायात को संभाला जा सके।

पैदल यात्रियों के लिए सुविधा: सरकार चौमासी की ओर से एक समर्पित वॉकवे और पैदल यात्री सुरंग बनाने की संभावना का भी अध्ययन करेगी, ताकि तीर्थयात्रियों के लिए अंतिम मील तक की कनेक्टिविटी (last-mile connectivity) बेहतर हो सके।

तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या यह कदम केदारनाथ में हर साल बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए उठाया गया है। पिछले वर्ष तीर्थयात्रियों की संख्या 17.7 लाख थी, जिसके 2030 तक 25 लाख और 2040 तक 40 लाख तक पहुँचने का अनुमान है। हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए, निर्माण शुरू करने से पहले विस्तृत भूवैज्ञानिक और हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन किए जाएंगे ताकि सुरंग बनाने के दौरान किसी भी अप्रत्याशित समस्या से बचा जा सके।

यह नई सुरंग प्रणाली एक व्यस्त इमारत में आपातकालीन निकास द्वार (Emergency Exit) की तरह काम करेगी; यह न केवल भीड़भाड़ वाले समय में आने-जाने का एक तेज़ रास्ता देगी, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर सुरक्षा का एक सुरक्षित मार्ग भी सुनिश्चित करेगी।

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