Menu
Select Language
EN
HI

हड्डियों से लेकर आधुनिक स्टील तक

K

KIRTI

Jan 28, 2026 • 6 Views

हड्डियों से लेकर आधुनिक स्टील तक

हड्डियों से लेकर आधुनिक स्टील तक 

 कैमरा बर्फ पर फिसलते हुए एक स्केटिंग खिलाड़ी पर केंद्रित है क्या आपने कभी सोचा है कि अपने पैरों पर पैनी छुरियाँ बांधकर फिसलन भरी बर्फ पर उतरना कितना अजीब विचार है? लेकिन आज यह एक वैश्विक खेल और मनोरंजन का हिस्सा है। आइस स्केट्स का इतिहास हजारों साल पुराना है, जो प्राचीन हड्डियों से शुरू होकर आज के आधुनिक स्टील तक पहुँच गया है।

 शुरुआती दौर – हड्डियों के स्केट्स (पुरानी कलाकृतियों का चित्रण, जहाँ हड्डियों को पैरों में बंधा दिखाया गया है) नरेटर: लोकप्रिय धारणा के विपरीत, शुरुआती स्केट्स धातु के नहीं बल्कि चिकनी हड्डियों से बने थे। दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व (2nd millennium BCE) के दौरान, मध्य यूरोप से लेकर यूरेशियन क्षेत्रों तक के लोगों ने गाय और भेड़ जैसे जानवरों की हड्डियों को काटकर अपने पैरों के आकार का बनाया। वे इनमें छेद करके चमड़े की पट्टियों के साथ अपने जूतों के नीचे बांध लेते थे। नरेटर: विशेषज्ञ बताते हैं कि इन हड्डियों पर सीधे पैर से धक्का देना मुश्किल था, इसलिए लोग आगे बढ़ने के लिए लकड़ी की छड़ियों (sticks) का उपयोग करते थे। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, इनका उपयोग काम के लिए कम और मौज-मस्ती या खेल के लिए अधिक किया जाता था।

धातु की क्रांति

 (13वीं शताब्दी के नीदरलैंड का दृश्य) नरेटर: 13वीं शताब्दी में नीदरलैंड के कारीगरों ने एक बड़ा बदलाव किया—उन्होंने हड्डी की जगह लोहे के ब्लेड का उपयोग करना शुरू किया। इन धातु के ब्लेडों ने स्केटिंग का तरीका पूरी तरह बदल दिया। धातु के ब्लेड बर्फ को हल्का सा पिघलाकर एक रास्ता (track) बना देते हैं, जिससे बेहतर नियंत्रण, अधिक गति और मुड़ने की क्षमता मिलती है। इसी नवाचार ने बिना छड़ी के स्केटिंग को संभव बनाया।

 विशिष्ट खेलों का उदय 

(विभिन्न प्रकार के स्केट्स—हॉकी, फिगर स्केटिंग और स्पीड स्केटिंग—का प्रदर्शन) नरेटर: 18वीं और 19वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के साथ, स्केट्स का निर्माण बड़े पैमाने पर होने लगा और खेलों के आधार पर इन्हें खास डिजाइन दिया गया:

  • स्पीड स्केटिंग:
  •  लंबी दूरी तय करने के लिए लंबे और पतले ब्लेड।
  • हॉकी: तेजी से मुड़ने और अचानक रुकने के लिए विशेष ब्लेड।
  • फिगर स्केटिंग: 
  • कूदने और स्पिन करने में मदद के लिए ब्लेड के अगले हिस्से में "टो पिक्स" (toe picks) जोड़े गए।

 आधुनिक तकनीक और क्लैप स्केट्स 

(स्पीड स्केटर के क्लैप स्केट्स का क्लोज-अप) नरेटर: पिछले कुछ दशकों में सबसे बड़ा बदलाव "क्लैप स्केट्स" (clap skates) का आना था। 1990 के दशक में लोकप्रिय हुए इन स्केट्स में ब्लेड जूतों के साथ पूरी तरह नहीं जुड़े होते, बल्कि आगे की तरफ एक कब्जा (hinge) होता है। इससे खिलाड़ी की एड़ी ऊपर उठ पाती है और ब्लेड ज्यादा समय तक बर्फ के संपर्क में रहता है, जिससे गति में भारी वृद्धि होती है।

निष्कर्ष: 

 हड्डियों से शुरू हुआ यह सफर अब बेस्पोक (bespoke) डिजाइन और उन्नत सामग्रियों तक पहुँच गया है। भले ही तकनीक बदल गई हो, लेकिन बर्फ पर बेखौफ होकर फिसलने का आनंद आज भी वही है।

 

Discussion