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ट्रंप का 'मिशन लैटिन अमेरिका' - चीन की इकोनॉमी पर सीधा प्रहार

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SAURABH TRIPATHI

Jan 07, 2026 • 4 Views

ट्रंप का 'मिशन लैटिन अमेरिका' - चीन की इकोनॉमी पर सीधा प्रहार

 दुनिया की नजरों में यह सिर्फ देशों के बीच का तनाव हो सकता है, लेकिन पर्दे के पीछे एक बहुत बड़ी आर्थिक जंग छिड़ चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अब चीन की आर्थिक ताकत को ध्वस्त करने के लिए दुनिया के 'रिसोर्स मैप' को ही बदलने का फैसला कर लिया है। इस रणनीति का केंद्र हैं— वेनेजुएला, क्यूबा, और पेरू जैसे देश।

मिनरल्स और मेटल्स की जंग :

 ट्रंप की नजर राजनीति से ज्यादा मेटल्स और मिनरल्स की ग्लोबल सप्लाई चेन पर है। आज की आधुनिक अर्थव्यवस्था, चाहे वो इलेक्ट्रिक कारें हों, सोलर पैनल हों या सेमीकंडक्टर, सब कुछ सिल्वर, कॉपर और लिथियम पर टिकी हैं।

  • अमेरिका को डर है कि यदि इन संसाधनों पर चीन का कंट्रोल और बढ़ा, तो भविष्य की टेक इंडस्ट्री पर चीन का पूरी तरह दबदबा हो जाएगा।
  • अनुमान के मुताबिक, सिल्वर और कॉपर जैसे कई महत्वपूर्ण संसाधनों पर चीन का सीधा या परोक्ष रूप से 60 से 90 फीसदी तक कंट्रोल है।

 सिल्वर का 'चीनी चक्रव्यूह' :

 यहाँ एक दिलचस्प तथ्य यह है कि मैक्सिको दुनिया का सबसे बड़ा सिल्वर प्रोड्यूसर है, लेकिन इसकी प्रोसेसिंग का मुख्य हिस्सा चीन में होता है।

  • 1 जनवरी से चीन ने सिल्वर एक्सपोर्ट पर सख्ती और प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं, जिससे वह इसे एक 'रणनीतिक हथियार' की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
  • बिना सिल्वर के आधुनिक इंडस्ट्री का चलना नामुमकिन है, और यही अमेरिका के लिए सबसे बड़ा अलार्म है।

 साउथ अमेरिका ही क्यों? :

 ट्रंप का मुख्य उद्देश्य अमेरिका के 'बैकयार्ड' (पड़ोस) में चीन की बढ़ती मौजूदगी को रोकना है।

  • चिली और पेरू तांबा (Copper) के बड़े उत्पादक हैं, जबकि बोलीविया में लिथियम का विशाल भंडार है। इन सभी देशों में चीनी कंपनियों ने भारी निवेश कर रखा है।
  • वेनेजुएला और क्यूबा जैसे देश लंबे समय से अमेरिका को चुनौती दे रहे थे, लेकिन अब वहाँ चीन और रूस की पकड़ मजबूत होना ट्रंप के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

निष्कर्ष (Conclusion): 

ट्रंप की यह रणनीति सिर्फ देशों पर दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि ग्लोबल मिनरल्स की जंग को जीतने के लिए है। इसका असर आने वाले समय में भारत समेत पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और कीमतों पर देखने को मिलेगा। ट्रंप एक तीर से दो निशाने लगाना चाहते हैं: अमेरिका की सप्लाई सिक्योरिटी को मजबूत करना और चीन की मैन्युफैक्चरिंग मशीनरी को कमजोर करना।

एक सरल उदाहरण (Analogy):

 इसे इस तरह समझें कि यदि आधुनिक तकनीक एक 'तिजोरी' है, तो ये रेयर मिनरल्स (सिल्वर, लिथियम) उसकी 'चाबी' हैं। वर्तमान में इस चाबी को बनाने का कारखाना (प्रोसेसिंग) चीन के पास है। ट्रंप की रणनीति अब अपना खुद का कारखाना बनाने और चाबी के कच्चे माल पर कब्जा करने की है, ताकि तिजोरी खोलने का अधिकार चीन के हाथों से छीना जा सके।

 

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