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आदित्य-एल1 ने खोले सौर तूफानों के रहस्य

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SAURABH TRIPATHI

Jan 10, 2026 • 10 Views

आदित्य-एल1 ने खोले सौर तूफानों के रहस्य

भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 ने सौर तूफानों से जुड़ी एक बड़ी वैज्ञानिक गुत्थी को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, इस मिशन से प्राप्त आंकड़ों ने यह समझने में मदद की है कि शक्तिशाली सौर तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर किस तरह असर डालते हैं।

इसरो ने बताया कि सौर तूफान के सबसे गंभीर प्रभाव उस समय सामने आए, जब उसका अत्यधिक अशांत (टर्बुलेंट) क्षेत्र पृथ्वी से टकराया। इस दौरान पृथ्वी के चुंबकीय वातावरण में असामान्य बदलाव देखे गए। यह शोध इस बात को रेखांकित करता है कि अंतरिक्ष मौसम की घटनाओं की निगरानी और उनका रियल-टाइम मूल्यांकन कितना जरूरी है

अक्टूबर 2024 की बड़ी अंतरिक्ष मौसमी घटना का विश्लेषण

दिसंबर 2025 में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित एक अध्ययन में इसरो के वैज्ञानिकों और शोध छात्रों ने अक्टूबर 2024 में पृथ्वी को प्रभावित करने वाली एक बड़ी अंतरिक्ष मौसमी घटना का गहन विश्लेषण किया।

इस अध्ययन में आदित्य-एल1 से प्राप्त डाटा के साथ-साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशनों की जानकारियों का भी उपयोग किया गया। इसका उद्देश्य सूर्य से निकले विशाल सौर प्लाज़्मा विस्फोट और उसके पृथ्वी पर पड़े प्रभावों को बेहतर ढंग से समझना था।

विद्युत ग्रिड और उपग्रहों पर पड़ा असर

इसरो के अनुसार, अंतरिक्ष मौसम का मतलब अंतरिक्ष में बनने वाली उन परिस्थितियों से है, जो सूर्य पर होने वाली अस्थायी गतिविधियों—जैसे सौर विस्फोट—के कारण पैदा होती हैं। ऐसी घटनाओं का असर पृथ्वी पर मौजूद उपग्रहों, संचार प्रणालियों, नेविगेशन सेवाओं और विद्युत ग्रिड अवसंरचना पर पड़ सकता है।

अध्ययन में सामने आया कि सौर तूफान के टर्बुलेंट क्षेत्र ने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को असामान्य रूप से बहुत अधिक संकुचित कर दिया। इसके कारण चुंबकीय क्षेत्र कुछ समय के लिए पृथ्वी के बेहद करीब आ गया, जिससे जियोस्टेशनरी कक्षा में मौजूद कुछ उपग्रह सीधे उसके प्रभाव में आ गए

इसरो के मुताबिक, ऐसी स्थिति केवल अत्यंत गंभीर अंतरिक्ष मौसम घटनाओं के दौरान ही देखने को मिलती है।

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