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10-मिनट डिलीवरी' ब्रांडिंग पर रोक - गिग वर्कर्स की सुरक्षा की जीत

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SAURABH TRIPATHI

Jan 13, 2026 • 20 Views

10-मिनट डिलीवरी' ब्रांडिंग पर रोक - गिग वर्कर्स की सुरक्षा की जीत

 भारत में क्विक-कॉमर्स ऐप्स के काम करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव आया है। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार को त्वरित वाणिज्य प्लेटफॉर्मों से '10-मिनट डिलीवरी' की ब्रांडिंग हटाने के निर्देश देने के लिए धन्यवाद 

 चड्ढा पिछले काफी समय से डिलीवरी सेक्टर में शोषक श्रम प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उन्होंने संसद में भी '10-मिनट डिलीवरी' प्रणाली पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, जहाँ उन्होंने तर्क दिया कि इन डिलीवरी एजेंटों की कार्य स्थितियाँ अक्सर दैनिक वेतन भोगी मजदूरों से भी खराब होती हैं,।

 

 राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस कदम की सराहना करते हुए इसे 'समय पर, निर्णायक और करुणामय हस्तक्षेप' बताया है,। उनका मानना है कि जब किसी राइडर की टी-शर्ट, जैकेट या बैग पर '10 मिनट' छपा होता है और ग्राहक की स्क्रीन पर टाइमर चलता है, तो राइडर पर पड़ने वाला मानसिक और शारीरिक दबाव वास्तविक और अत्यंत खतरनाक होता है।

मुख्य बिंदु:

  • अवास्तविक लक्ष्य: चड्ढा ने कहा कि कई डिलीवरी पार्टनर कम वेतन में अपनी जान जोखिम में डालकर अवास्तविक वादों को पूरा कर रहे हैं,।
  • आर्थिक शोषण: उन्होंने दिसंबर में एक उदाहरण साझा किया था जहाँ एक एजेंट ने 15 घंटे की ड्यूटी में केवल 763 रुपये कमाए थे। इसे उन्होंने 'सिस्टमैटिक शोषण' (systemic exploitation) करार दिया।
  • जागरूकता अभियान: 
  • मुद्दे की गंभीरता को समझने के लिए सांसद चड्ढा खुद एक डिलीवरी एजेंट की वर्दी पहनकर एक दिन उनके साथ रहे थे ताकि उनकी समस्याओं को करीब से जान सकें।

 उन्होंने इन गिग वर्कर्स को 'भारतीय अर्थव्यवस्था के अदृश्य पहिये' कहा है, जो अवास्तविक समय सीमा को पूरा करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। सरकार के इस हस्तक्षेप को मानवीय जीवन, सुरक्षा और गरिमा की जीत के रूप में देखा जा रहा है।

समापन

 इस कदम से उम्मीद है कि भविष्य में डिलीवरी पार्टनर्स के लिए काम का माहौल सुरक्षित और सम्मानजनक बनेगा।

एनालॉजी (Analogy): इसे इस तरह समझा जा सकता है जैसे किसी धावक को एक ऐसी दौड़ में दौड़ना पड़े जहाँ पीछे एक शिकारी खड़ा हो; '10-मिनट' का टाइमर उसी शिकारी की तरह था जो सुरक्षा की कीमत पर गति का दबाव बनाता था। ब्रांडिंग हटाना उस शिकारी को हटाने जैसा है, ताकि धावक अपनी क्षमता और सुरक्षा के अनुसार दौड़ सके।

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