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कोलकाता में हाई वोल्टेज ड्रामा - ED बनाम ममता बनर्जी

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SAURABH TRIPATHI

Jan 08, 2026 • 12 Views

कोलकाता में हाई वोल्टेज ड्रामा - ED बनाम ममता बनर्जी

 आज कोलकाता की सड़कों पर भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच की तकरार अब कलकत्ता हाई कोर्ट तक पहुँच गई है। चुनावी रणनीतिकार समूह I-PAC के ठिकानों पर हुई छापेमारी ने राज्य में एक नया राजनीतिक युद्ध छेड़ दिया है।

 यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब ED ने कोयला खनन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय पर छापेमारी की। ED का दावा है कि तलाशी तब तक शांतिपूर्ण रही जब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ वहाँ नहीं पहुँचीं।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम:

  • दस्तावेजों को हटाना: ED ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों ने जाँच में बाधा डाली और महत्वपूर्ण शारीरिक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को "जबरन हटा" दिया। मौके के दृश्यों में ममता बनर्जी को एक बड़ी हरी फाइल लेकर बाहर निकलते देखा गया।
  • ED का दावा: जाँच एजेंसी के अनुसार, कोयला तस्करी के आरोपी अनूप माझी और उसके सिंडिकेट ने हवाला के जरिए लगभग 10 करोड़ रुपये I-PAC को भेजे थे। यह पैसा कथित तौर पर 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों में TMC के अभियान की फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया गया था।
  • ममता बनर्जी का पलटवार:
  •  तृणमूल सुप्रीमो ने इन छापों को "राजनीति से प्रेरित" करार दिया है। उनका आरोप है कि गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर यह कार्रवाई 2026 के चुनावों से संबंधित पार्टी डेटा और उम्मीदवारों की सूची "चोरी" करने के लिए की गई है।

 इस घटना के बाद ममता बनर्जी ने I-PAC कार्यालय में धरना (sit-in protest) भी दिया। अब यह मामला कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। जहाँ ED ने ममता बनर्जी पर जाँच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है, वहीं I-PAC ने भी छापेमारी पर रोक लगाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

 दूसरी ओर, प्रतीक जैन के परिवार ने ED के खिलाफ चोरी की शिकायत दर्ज कराई है। तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को एक विशाल विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है, जिससे बंगाल की राजनीति में गर्माहट और बढ़ने के आसार हैं।

नोट: यह जानकारी पूरी तरह से आपके द्वारा दिए गए स्रोतों पर आधारित है।

एक सरल सादृश्य (Analogy): 

यह स्थिति वैसी ही है जैसे किसी जाँच दल को किसी घर की तलाशी लेने से इसलिए रोक दिया जाए क्योंकि घर का मालिक यह दावा कर रहा है कि जाँच के बहाने उनके निजी पारिवारिक रहस्य चुराए जा रहे हैं, जबकि जाँच दल का कहना है कि वे केवल एक वित्तीय चोरी के सुराग ढूँढ रहे हैं।

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