Menu
Select Language
EN
HI

द राजा साब (The Raja Saab): विशाल और भव्य भूलभुलैया (labyrinth)

K

KIRTI

Jan 10, 2026 6
द राजा साब (The Raja Saab): विशाल और भव्य भूलभुलैया (labyrinth)

 द राजा साब (The Raja Saab)

शैली: हॉरर-कॉमेडी / मिस्टिकल थ्रिलर

 पात्र:

  • राजू (प्रभास): एक खुशमिजाज कुंवारा युवक।
  • कनकराजु (संजय दत्त): एक दुष्ट जादूगर और राजू का दादा।
  • डॉक्टर पद्मभूषण (बोमन ईरानी): एक मनोवैज्ञानिक और पारलौकिक विशेषज्ञ।
  • गंगम्मा (जरीना वहाब): राजू की दादी।
  •  प्रेतवाधित महल का मुख्य हॉल 

(महल पुराना और डरावना है। राजू महल के बीचों-बीच खड़ा है, जहाँ आग और खतरनाक पटाखे (pyrotechnics) चल रहे हैं। कनकराजु ऊपरी बालकनी पर खड़ा है। दोनों के बीच कोई शारीरिक संपर्क नहीं है, लेकिन एक मानसिक युद्ध चल रहा है)

कनकराजु: (अट्टहास करते हुए) राजू, तू इस महल से बाहर नहीं जा सकता। यहाँ मेरा राज चलता है। मुझे दौलत और अमरता (immortality) चाहिए, और तू बस एक मोहरा है!

राजू: (साहस के साथ) यह आपका वहम है, दादाजी। मैं यहाँ अपनी दादी की खोई हुई इज्जत वापस लेने आया हूँ। आप मुझे सम्मोहन (hypnosis) से डरा नहीं सकते।

कनकराजु: (आँखें तरेरते हुए) मेरी जादुई शक्तियाँ तुझे घुटनों पर ले आएंगी। देख, तेरे चारों ओर मगरमच्छ और आग है! यह 'दिमाग का खेल' (game of minds) तू कभी नहीं जीत पाएगा।

 राजू का आंतरिक मन / आध्यात्मिक क्षेत्र

(राजू अपनी आँखें बंद करता है। बैकग्राउंड में डॉक्टर पद्मभूषण की आवाज गूँजती है)

डॉक्टर पद्मभूषण : राजू, डरो मत। अपने भीतर की शक्तियों को पहचानो। अपने 'मानसिक चक्रों' (psychic chakras) को जागृत करो और आत्म-सम्मोहन (self-hypnosis) का सहारा लो। तुम्हें उसे उसी के खेल में हराना होगा।

राजू: (स्वयं से) मुझे अपनी दादी गंगम्मा के लिए यह करना होगा। मुझे अपनी आंतरिक शक्ति का हर कतरा इस्तेमाल करना है।

(राजू की आँखों में एक नई चमक आती है। वह कनकराजु के जादुई प्रभाव को अपने 'सेल्फ-हिप्नोसिस' से काटने लगता है)

 महल का अंत (क्लाइमेक्स)

(महल हिलने लगता है। राजू और कनकराजु के बीच एक मनोवैज्ञानिक टकराव (cerebral connection) होता है। राजू कनकराजु को पछाड़ देता है)

राजू: खेल खत्म, कनकराजु! अब आप अपनी ही बनाई भूलभुलैया (labyrinth) में खो चुके हैं।

कनकराजु: (हारते हुए) नहीं... यह मुमकिन नहीं है!

 

  • फिल्म की स्थिति: स्रोतों के अनुसार, फिल्म का विचार (concept) बहुत मजबूत है, लेकिन इसकी पटकथा (screenplay) और निष्पादन (execution) काफी कमजोर और 'आउटडेटेड' बताया गया है।
  • प्रभास का प्रदर्शन: इस फिल्म में प्रभास को एक बहुत ही सहज और 'रिलेटेबल' (relatable) अवतार में देखा गया है, जो दर्शकों के लिए फिल्म का सबसे अच्छा हिस्सा है।
  •  फिल्म को इसकी सुस्त रफ़्तार और जटिल कहानी के कारण 2 स्टार की रेटिंग दी गई है।

 यह फिल्म एक ऐसी विशाल और भव्य भूलभुलैया (labyrinth) की तरह है, जिसमें घुसते समय तो बहुत उत्साह होता है, लेकिन अंदर जाने पर रास्ता इतना उलझा हुआ मिलता है कि अंत तक पहुँचते-पहुँचते इंसान अपनी दिशा ही भूल जाता है।

Discussion

0 Comments

Leave a Reply