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'कभी खुशी कभी ग़म ने बजट की सीमाएँ तोड़ दीं

K

KIRTI

Jan 12, 2026 20
'कभी खुशी कभी ग़म ने बजट की सीमाएँ तोड़ दीं

यहाँ 'कभी खुशी कभी ग़म' के निर्माण के दौरान की एक मशहूर घटना पर आधारित एक संक्षिप्त पटकथा (Script) दी गई है, जो आपके द्वारा दिए गए स्रोतों पर आधारित है:

शीर्षक: जब 'बोले चूड़ियाँ' ने बजट की सीमाएँ तोड़ दीं

पात्र:

  • यश जौहर: एक अनुभवी और उत्साही निर्माता।
  • निखिल आडवाणी: फिल्म के सहायक निर्देशक।
  • करण जौहर: फिल्म के निर्देशक।
  •  यश जौहर का कार्यालय - दिन

करण जौहर और निखिल आडवाणी, यश जौहर को 'कभी खुशी कभी ग़म' (K3G) की कहानी सुनाते हैं। कहानी सुनने के बाद, यश जौहर निखिल को अपने पास बुलाते हैं।

यश जौहर: निखिल, ज़रा कागज़ पर लिखकर बताओ कि इस फिल्म का बजट कितना होगा?

निखिल आडवाणी: (कागज़ पर लिखते हुए) सर, मेरा अनुमान है कि हम इसे ₹3 करोड़ में बना लेंगे,।

यश जौहर मुस्कुराते हैं और बजट को मंज़ूरी दे देते हैं। वह कहते हैं, "ठीक है, फिल्म शुरू करो"।

 'बोले चूड़ियाँ' का सेट - दिन

सेट पर भारी भीड़ और भव्यता है। 200 डांसर और 300 जूनियर कलाकार मौजूद हैं। करण जौहर ने भव्यता दिखाने के लिए विशेष रूप से बड़े-बड़े झूमर (jhoomars) बनवाए हैं।

सेट पर अफरा-तफरी का माहौल है।

निखिल (स्वगत): यहाँ सब पागलपन जैसा है। करण सेट पर बेहोश हो गए हैं, और काजोल को अपने लहंगे के साथ डांस करने में दिक़्क़त हो रही है।

 शाम - चाय का ब्रेक

यश जौहर, निखिल और करण के साथ चाय पर बैठे हैं। माहौल शांत है, लेकिन यश जी के हाथ में वही पुराना बजट वाला कागज़ है।

यश जौहर: निखिल, क्या तुम्हें याद है कि तुमने इस फिल्म के लिए कितना बजट तय किया था?

निखिल आडवाणी: (घबराते हुए) सर, मुझे ठीक से याद नहीं है।

यश जौहर वह कागज़ निकालते हैं और ज़ोर से पढ़ते हैं—"₹3 करोड़"। फिर वह सेट की भव्यता की ओर इशारा करते हैं।

यश जौहर: जो सेट तुमने यहाँ खड़ा किया है, उसकी लागत ही तुम्हारे इस ₹3 करोड़ के पूरे बजट से ज़्यादा है!

निखिल और करण चुपचाप सुनते रहते हैं। यश जौहर अचानक उस कागज़ को फाड़ देते हैं

यश जौहर: (मुस्कुराते हुए) अब, तुम अपनी फिल्म बनाओ!

निखिल आडवाणी के विचार (वॉयसओवर): आज के दौर में लोग बजट स्प्रेडशीट पर बनाते हैं, लेकिन यश जौहर जैसे लोग सिनेमा के प्रति अपने जुनून (passion) के लिए जाने जाते थे,। वे बॉक्स ऑफिस नंबरों से नहीं, बल्कि सिनेमा की समझ से फिल्में बनाते थे।

विशेष जानकारी: निखिल आडवाणी बताते हैं कि उन दिनों फिल्में बनाने का एक अलग ही 'नशा' होता था। यश जौहर और यश चोपड़ा जैसे निर्माता सिनेमा को समझते थे और उन्होंने कभी भी कलाकारों की संख्या पर सवाल नहीं उठाया, हालाँकि वे हमेशा यह ज़रूर पूछते थे कि उनकी ज़रूरत क्यों है।

आज के दौर में, निखिल को लगता है कि केवल करण जौहर और आदित्य चोपड़ा ही फिल्म निर्माण के उस पुराने 'पागलपन' और युग को वापस ला सकते हैं।

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